नई दिल्ली: रेखा सरकार ने मानसून के दौरान बाढ़ से निपटने के लिए ट्रांस-यमुना क्षेत्र के तीनों जिलों के लिए तीन सेक्टर समितियों का गठन किया गया है। शिक्षा, गृह एवं ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को मानसून के दौरान बाढ़ की तैयारियों के मुद्दे पर चर्चा करने और संबंधित एजेंसियों के बीच तैयारियों एवं समन्वय का आकलन करने के लिए उत्तर-पूर्वी, शाहदरा और पूर्वी जिलों के जिलाधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक के दौरान जिलाधिकारियों के साथ मुख्य अभियंता, आई एंड एफसी विभाग, तथा संबंधित विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
उत्तर-पूर्व जिला के डीएम ने मंत्री को अवगत कराया कि संभावित बाढ़ प्रभावित परिवारों की पहचान कर उनको अन्य जगह भेजने की योजना तैयार की गई है। राहत शिविरों की स्थापना, राहत सामग्री वितरण और स्वयंसेवकों की तैनाती की योजना भी तैयार है। यमुना नदी के जलस्तर की वास्तविक समय निगरानी की जा रही है। इसके लिए सीडब्ल्यूसी, हथिनी कुंड बैराज और आईएमडी से डेटा लिया जा रहा है। हथिनी कुंड से छोड़े गए पानी के आधार पर तीन स्तरीय चेतावनी प्रणाली लागू की गई है, जिससे 36 घंटे पहले कार्यवाही की जा सकती है। 14 बचाव नावें, 26 पंप, 5 मोबाइल पंप और 1 स्थायी पंप कार्यशील हैं। राजस्व, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, एमसीडी, दिल्ली जल बोर्ड, डीयूएसआईबी, स्वास्थ्य, पुलिस, शिक्षा, डीडीए, पीडब्ल्यूडी और बीएसईएस सहित सभी प्रमुख विभागों के नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं।
पूर्वी जिला के डीएम ने बताया कि बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित कर निगरानी की जा रही है। संवेदनशील स्थलों की पहचान कर ली गई है। हथिनी कुंड बैराज, सीडब्ल्यूसी और आईएमडी के बीच रीयल-टाइम नेटवर्क से निगरानी की जा रही है। यातायात प्रबंधन योजना भी तैयार है।
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की तैयारी मुख्य अभियंता, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने बताया 23 स्थायी पंपों के अतिरिक्त 4 अस्थायी और 5 मोबाइल पंप तैयार रखे गए हैं। सभी फ्लडगेट और रेगुलेटर कार्यशील स्थिति में हैं। विभाग अप्रत्याशित वर्षा से निपटने के लिए भी पूरी तरह से तैयार हैं।
सूद ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चेकलिस्ट आधारित कार्ययोजना के अनुसार समयबद्ध रूप से निकासी व राहत कार्य सुनिश्चित किए जाएं। विस्थापित लोगों को टेंट, पीने का पानी, भोजन और विशेष रूप से महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
जलभराव के संभावित स्थलों पर नोडल अधिकारियों की तैनाती हो। बांधों की चौबीसों घंटे निगरानी की जाए। यदि यमुना का जलस्तर 204.5 मीटर की चेतावनी सीमा पार करता है, तो निचले इलाकों में रहने वालों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाए। यातायात में बाधा न आए, इसके लिए सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग सुनिश्चित करे कि यमुना का पानी मुख्य सडक़ों में प्रवेश न करे। सभी फ्लडगेट व रेगुलेटर पूरी तरह कार्यशील रखें। मंत्री महोदय स्वयं केंद्रीय नियंत्रण कक्ष और फील्ड में तैयारियों की समीक्षा करेंगे।



