कृषि क्षेत्र में प्रगति का नया सवेरा: जानिए क्या है शिवराज सिंह चौहान की नई योजना?

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा शुरू की गई 'प्रगति' योजना का मुख्य उद्देश्य देश के 20 हजार ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी (Agri-entrepreneurs) बनाना है। इसके माध्यम से 8 प्रमुख राज्यों के 20 लाख छोटे और सीमांत किसानों की आय, उत्पादकता और आजीविका में सुधार लाया जाएगा। यह योजना तकनीक, वैल्यू एडिशन और फसल विविधीकरण पर केंद्रित है।

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नई दिल्ली : भारतीय कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया और आधुनिक आयाम देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को ‘प्रगति’ (PRAGATI) नामक एक नए राष्ट्रीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया है। इस पहल का सीधा लक्ष्य देश के उन छोटे और सीमांत किसानों की तकदीर बदलना है, जो पारंपरिक रूप से केवल उत्पादन पर निर्भर रहते हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव का शिकार होते हैं।

इस योजना के तहत देशभर के 20 हजार ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित करके उन्हें कुशल कृषि-उद्यमी के रूप में विकसित किया जाएगा। ये युवा आगे चलकर देश के लगभग 20 लाख छोटे और सीमांत किसानों की आय और उत्पादकता बढ़ाने में मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे। सरकार का मानना है कि ‘विकसित भारत’ का सपना तब तक पूरा नहीं हो सकता, जब तक हमारे गांव समृद्ध और कृषि व्यवस्था विकसित न हो।

प्रगति’ योजना क्या है और इसका ढांचा कैसे काम करेगा?

यह योजना केवल एक सरकारी सब्सिडी या पारंपरिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक ‘बहु-साझेदार पहल’ (Multi-stakeholder Initiative) है जिसमें सरकार, वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालय और ग्रामीण युवा मिलकर काम करेंगे।

इन 8 राज्यों में पहले चरण की शुरुआत

‘प्रगति’ पहल को देश के उन प्रमुख राज्यों में लागू किया जा रहा है जहाँ छोटे और सीमांत किसानों की संख्या अधिक है और जिन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों की सबसे ज्यादा जरूरत है। ये राज्य हैं:

  • मध्य प्रदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • महाराष्ट्र
  • राजस्थान
  • पश्चिम बंगाल
  • असम
  • झारखंड

गांव स्तर पर कृषि-उद्यमियों की भूमिका

कार्यक्रम के तहत तैयार किए जाने वाले कृषि-उद्यमी सीधे गांव स्तर पर तैनात होंगे। प्रत्येक उद्यमी अपने क्षेत्र के 100 से 200 किसानों के साथ मिलकर काम करेगा। वे गांवों में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान करेंगे:

  1. मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन (Soil Health): मिट्टी का वैज्ञानिक परीक्षण करना और उसके अनुसार खाद के उपयोग की सलाह देना।
  2. मशीन सेवाएं: छोटे किसानों के लिए महंगे कृषि उपकरण और मशीनें किराए पर उपलब्ध कराना।
  3. वित्तीय लिंक (Financial Connect): किसानों को सरकारी योजनाओं, बैंक लोन और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से जोड़ना।
  4. बाजार और तकनीक से जुड़ाव: किसानों की फसलों को सीधे बड़े बाजारों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जोड़ना ताकि उन्हें सही दाम मिल सके।

केवल खेती से नहीं, ‘वैल्यू एडिशन’ से बढ़ेगी असली कमाई

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कड़वी सच्चाई को सामने रखा। उन्होंने कहा कि आज के समय में छोटे जोत वाले (कम जमीन वाले) किसानों के लिए केवल पारंपरिक खेती करना पर्याप्त नहीं है। अगर किसान केवल गेहूं या धान उगाकर उसे सीधे मंडी में बेचेगा, तो उसकी लागत के मुकाबले मुनाफा हमेशा सीमित रहेगा।

इस समस्या का समाधान है वैल्यू एडिशन (Value Addition) और प्रोसेसिंग।

उदाहरण के लिए: यदि कोई किसान सीधे टमाटर बेचता है, तो उसे कम दाम मिलते हैं। लेकिन अगर उसी टमाटर से सॉस, प्यूरी या पाउडर बनाने की छोटी यूनिट गांव स्तर पर लग जाए, तो उसका मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है।

इसके साथ ही योजना में फसल विविधीकरण (Crop Diversification) पर बहुत ज्यादा जोर दिया गया है। किसानों को पारंपरिक फसलों के अलावा इन क्षेत्रों की तरफ मोड़ा जाएगा:

  • बागवानी (Horticulture): फल और सब्जियों की वैज्ञानिक खेती।
  • पशुपालन और मत्स्य पालन (Animal Husbandry & Fisheries): दूध और मछली उत्पादन से रोजाना की आय सुनिश्चित करना।
  • मधुमक्खी पालन (Beekeeping): अतिरिक्त आय का एक बेहतरीन और कम लागत वाला जरिया।

आधुनिक तकनीक और महिलाओं की भागीदारी

भविष्य की खेती पूरी तरह से विज्ञान और डिजिटल तकनीक पर टिकी है। ‘प्रगति’ योजना के तहत कृषि में आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा:

  • ड्रोन तकनीक: खेतों में कीटनाशकों और उर्वरकों के संतुलित छिड़काव के लिए ड्रोन का उपयोग।
  • डिजिटल सलाह: मोबाइल ऐप के जरिए वैज्ञानिकों द्वारा सीधे किसानों को मौसम और फसलों की बीमारियों की सटीक जानकारी देना।

कृषि सखी’ बनेंगी बदलाव का चेहरा

इस पूरी योजना में महिलाओं की भागीदारी को सबसे ऊपर रखा गया है। बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं को ‘कृषि सखी’ और महिला उद्यमी के रूप में तैयार किया जा रहा है। जब एक महिला ग्रामीण स्तर पर आत्मनिर्भर बनती है, तो वह पूरे परिवार और गांव की आर्थिक स्थिति को बदल देती है।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और वर्तमान रुझान: एक तुलनात्मक विश्लेषण

भारतीय कृषि ने आजादी के बाद से अब तक एक लंबा सफर तय किया है। ‘प्रगति’ योजना को बेहतर ढंग से समझने के लिए हमें पुराने दौर और आज के बदलते रुझानों की तुलना करनी होगी:

मापदंड / दौरपारंपरिक या ऐतिहासिक दौर (1960-1990 के दशक)वर्तमान रुझान और ‘प्रगति’ योजना (2026 और भविष्य)
मुख्य फोकसकेवल उत्पादन बढ़ाना (Production Centric): हरित क्रांति के दौर में मुख्य लक्ष्य देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाना था।लागत घटाना और आय बढ़ाना (Income Centric): अब फोकस सिर्फ पैदावार पर नहीं, बल्कि किसान की जेब में पहुंचने वाले शुद्ध मुनाफे पर है।
तकनीक का स्तरसीमित और पारंपरिक: खेती मुख्य रूप से बैलों, साधारण ट्रैक्टरों और पारंपरिक बीजों पर निर्भर थी।स्मार्ट और डिजिटल एग्री (AgTech): ड्रोन, सॉइल हेल्थ कार्ड, एआई-आधारित मौसम पूर्वानुमान और डिजिटल मार्केटप्लेस का उपयोग।
खाद और उर्वरकअंधाधुंध रासायनिक उपयोग: पैदावार बढ़ाने के लिए यूरिया और रसायनों का भारी इस्तेमाल हुआ, जिससे धीरे-धीरे मिट्टी खराब होने लगी।संतुलित और प्राकृतिक खेती: ‘खेत बचाओ अभियान’ और ‘प्रगति’ के तहत मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
बाजार पहुंचबिचौलियों पर निर्भरता: किसान अपनी उपज स्थानीय मंडियों या आढ़तियों को कम दामों पर बेचने के लिए मजबूर थे।डायरेक्ट मार्केट लिंक: FPOs (किसान उत्पादक संगठन) और एग्री-इंटरप्रेन्योर्स के जरिए सीधे बाजारों और फूड प्रोसेसर्स से जुड़ाव।

इस ऐतिहासिक विश्लेषण से साफ है कि भारत अब “अधिक उत्पादन” के चरण से आगे बढ़कर “स्मार्ट और टिकाऊ कृषि” के युग में प्रवेश कर चुका है। ‘प्रगति’ इसी बदलते दौर की एक मजबूत कड़ी है जो जलवायु-संवेदनशील (Climate-Resilient) कृषि को बढ़ावा देती है ताकि मौसम के बदलते मिजाज के बीच भी किसानों की आजीविका सुरक्षित रहे।

निष्कर्ष (Conclusion)

‘प्रगति’ केवल कागजों पर चलने वाली कोई योजना नहीं है, बल्कि यह गांवों को आत्मनिर्भर, रोजगारयुक्त और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का एक जमीनी संकल्प है। गांव के ही युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें बिजनेस लीडर बनाना और उनके जरिए छोटे किसानों को तकनीक से जोड़ना एक ऐसी सोच है, जो भविष्य में ग्रामीण भारत से पलायन को भी रोकने में मददगार साबित होगी। यदि यह पहल जमीन पर सही ढंग से लागू होती है, तो यह देश के कृषि परिदृश्य में एक युगांतरकारी बदलाव ला सकती है।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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