भारत और इंडोनेशिया के बीच डिजिटल और सांस्कृतिक क्रांति का नया सवेरा

भारत और इंडोनेशिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाते हुए लगभग एक दर्जन ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें भारत के यूपीआई (UPI) को इंडोनेशिया के डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जोड़ना, समुद्री सुरक्षा फ्रेमवर्क, अंतरिक्ष अनुसंधान में सहयोग, आईआईएम बैंगलोर का नया इंटरनेशनल कैंपस और प्रम्बानन मंदिर का संरक्षण शामिल है। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और सांस्कृतिक कूटनीति को एक नई दिशा देगा।

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जकार्ता/नई दिल्ली: भारत और इंडोनेशिया के बीच के रिश्ते केवल दो देशों के कूटनीतिक संबंध नहीं हैं, बल्कि यह दो प्राचीन सभ्यताओं का मिलन है जो अब 21वीं सदी की आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी इंडोनेशिया यात्रा के दौरान जकार्ता में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कई बड़े ऐलान किए। इनमें सबसे प्रमुख और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करने वाला फैसला है—भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इंडोनेशिया के पेमेंट सिस्टम से जुड़ना।

डिजिटल क्रांति: अब बाली और जकार्ता में भी QR कोड स्कैन करके होगा पेमेंट

भारत में आज सब्जी की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक, हर जगह लोग मोबाइल निकाल कर QR कोड स्कैन करते हैं और भुगतान कर देते हैं। यही तकनीक अब इंडोनेशिया की सड़कों और बाजारों में भी दिखाई देगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डिजिटल जुड़ाव की घोषणा करते हुए कहा:

“हमें खुशी है कि भारत का यूपीआई इंडोनेशिया के पेमेंट सिस्टम के साथ जुड़ने जा रहा है। इससे कारोबार करने और यात्रा करने, दोनों में आसानी होगी।”

इसका आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

  • बिना किसी झंझट के यात्रा: यदि आप इंडोनेशिया घूमने (जैसे बाली या जकार्ता) जाते हैं, तो आपको भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा (कैश) ले जाने या महंगे अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। आप अपने फोन में मौजूद भारतीय पेमेंट ऐप (जैसे Google Pay, PhonePe, या BHIM) के जरिए वहां के स्थानीय स्टोर्स पर सीधे भुगतान कर सकेंगे।
  • कारोबारियों को फायदा: छोटे और मध्यम स्तर के व्यापारियों को क्रॉस-बॉर्डर (अंतरराष्ट्रीय) लेनदेन करने में कम फीस देनी होगी और पैसा तुरंत ट्रांसफर हो जाएगा।

तकनीकी और रणनीतिक क्षेत्रों में मजबूत कदम

आज के समय में कोई भी देश अकेले तरक्की नहीं कर सकता। वैश्विक स्तर पर चीजों की सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) का मजबूत होना बहुत जरूरी है, ताकि युद्ध या महामारी जैसी स्थितियों में भी व्यापार न रुके। इसी को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों के बीच तकनीक, मिनरल्स (खनिज) और स्टील सेक्टर को लेकर महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं।

  • स्टेनलेस स्टील और रेयर-अर्थ मैग्नेट: भारत और इंडोनेशिया की कंपनियों के बीच महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) और स्टील के क्षेत्र में नई साझेदारियां बन रही हैं। रेयर-अर्थ मैग्नेट का इस्तेमाल स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और रक्षा उपकरणों में बड़े पैमाने पर होता है।
  • समुद्री सुरक्षा फ्रेमवर्क: हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा और सहयोग के लिए एक मजबूत फ्रेमवर्क को अंतिम रूप दिया है।
  • अंतरिक्ष में सहयोग: भारत की स्पेस एजेंसी इसरो (ISRO) अब शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाहरी अंतरिक्ष की खोज में इंडोनेशिया की मदद करेगी। इसरो इंडोनेशिया के अंतरिक्ष क्षेत्र की क्षमता और वहां की सैटेलाइट तकनीक को बढ़ाने में अपना तकनीकी सहयोग देगा।

इतिहास और वर्तमान का संगम: साझा सांस्कृतिक विरासत

भारत और इंडोनेशिया का रिश्ता आज का नहीं है। इतिहास के पन्नों को पलटें तो चोल राजवंश के समय से ही भारत के दक्षिण पूर्वी एशिया के साथ गहरे व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। रामायण और महाभारत की कहानियां आज भी इंडोनेशिया के लोकनृत्य और संस्कृति का हिस्सा हैं।

इसी साझा विरासत को सहेजने के लिए दोनों देशों ने एक और बड़ा कदम उठाया है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो योग्याकार्टा में स्थित प्रम्बानन मंदिर (Prambanan Temple) के संरक्षण प्रोजेक्ट की शुरुआत करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा:

“कल, मुझे राष्ट्रपति प्राबोवो के साथ योग्याकार्टा में प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण प्रोजेक्ट की शुरुआत करने का सौभाग्य मिलेगा। एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना प्रम्बानन मंदिर भारत और इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।”

टैगोर-देवान्तारा वर्ष की शुरुआत

इसके साथ ही, भारत और इंडोनेशिया महान कवि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की इंडोनेशिया की ऐतिहासिक यात्रा की शताब्दी को ‘सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति के टैगोर-देवान्तारा वर्ष’ के रूप में मनाएंगे। यह दोनों देशों के बीच शिक्षा और कला के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा।

शिक्षा का अंतर्राष्ट्रीयकरण: इंडोनेशिया में खुलेगा IIM बैंगलोर का कैंपस

भारत की उच्च शिक्षा को वैश्विक मंच पर ले जाने की दिशा में एक और ऐतिहासिक समझौता हुआ है। भारत का प्रतिष्ठित संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट बैंगलोर (IIMB) इंडोनेशिया के मलंग में स्थित ‘सिंघासारी स्पेशल इकोनॉमिक जोन’ (SEZ) में अपना नया कैंपस स्थापित करने जा रहा है।

इस फैसले से न केवल इंडोनेशिया बल्कि पूरे आसियान (ASEAN) क्षेत्र के युवाओं को भारत के विश्वस्तरीय बिजनेस मैनेजमेंट एजुकेशन का लाभ उठाने का मौका मिलेगा।

ऐतिहासिक विश्लेषण और वर्तमान रुझान (Comparative Analysis)

अगर हम इतिहास और वर्तमान के ट्रेंड्स की तुलना करें, तो भारत और इंडोनेशिया के संबंधों में एक बड़ा बदलाव आया है:

क्षेत्रऐतिहासिक स्थिति (Past)वर्तमान रुझान (Current Trends)
संबंधों का आधारमुख्य रूप से सांस्कृतिक, धार्मिक (हिंदू-बौद्ध धर्म का प्रसार) और समुद्री व्यापारिक मार्गों तक सीमित था।अब संस्कृति के साथ-साथ डिजिटल तकनीक, अंतरिक्ष विज्ञान और रणनीतिक सुरक्षा मुख्य आधार बन चुके हैं।
वित्तीय लेनदेनपारंपरिक मुद्रा विनिमय (Currency Exchange) और हुंडी प्रणाली, जिसमें हफ्तों का समय लगता था।रीयल-टाइम डिजिटल पेमेंट (UPI) का एकीकरण, जिससे कुछ सेकंड के भीतर सीमा-पार लेनदेन संभव होगा।
शिक्षा और सहयोगप्राचीन काल में नालंदा जैसी यूनिवर्सिटीज में ज्ञान का आदान-प्रदान होता था।अब आधुनिक समय में IIM बैंगलोर जैसे वैश्विक स्तर के संस्थान विदेशों में अपने कैंपस खोल रहे हैं।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों में कहें तो, “मुझे विश्वास है कि आज से भारत-इंडोनेशिया साझेदारी का एक सुनहरा अध्याय शुरू होगा। इस सुनहरे अध्याय का 21वीं सदी की दुनिया पर बहुत बड़ा सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।” यह साझेदारी न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को गति देगी, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति और समृद्धि का एक नया दौर लेकर आएगी।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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