बंगाल के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील में अंडा रहेगा, ‘ओडिशा मॉडल’ पर विचार

पश्चिम बंगाल सरकार मिड-डे मील में अंडा जारी रखने के लिए 'ओडिशा मॉडल' पर विचार कर रही है। ISKCON विवाद के बीच स्कूलों को अतिरिक्त फंड देने की तैयारी।

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील से अंडा हटाए जाने की अटकलों के बीच सियासी विवाद गहरा गया है। विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। इस बीच राज्य सरकार अब ‘ओडिशा मॉडल’ अपनाने पर विचार कर रही है, जिसके तहत स्कूलों को मिड-डे मील के लिए अंडे खरीदने हेतु अलग से अतिरिक्त फंड उपलब्ध कराया जा सकता है।

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार ने 1,800 से अधिक सरकारी स्कूलों में कक्षा 8 तक के छात्रों के लिए मिड-डे मील तैयार करने की जिम्मेदारी इस्कॉन को सौंपने का फैसला किया। इसके बाद संस्था ने स्पष्ट किया कि वह अपने भोजन में अंडा या किसी भी प्रकार का मांसाहारी भोजन शामिल नहीं करेगी। इसी के बाद यह आशंका जताई जाने लगी कि सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील से अंडा हटाया जा सकता है, जिस पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया।

ओडिशा मॉडल पर क्यों हो रही चर्चा?

टीएमसी ने आरोप लगाया कि बच्चों पर शाकाहारी भोजन थोपने की कोशिश की जा रही है और इससे उनके पोषण पर असर पड़ सकता है। वहीं कई लोगों ने यह भी कहा कि बीजेपी शासित ओडिशा में सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील में अंडा दिया जाता है। इन विवादों के बीच राज्य सरकार अब ऐसे मॉडल पर विचार कर रही है, जिसमें ISKCON द्वारा शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराया जाए, जबकि स्कूलों को अलग से फंड देकर छात्रों के लिए अंडे भी उपलब्ध कराए जाएं।

1 जुलाई को हो सकती है अहम बैठक

सूत्रों के अनुसार, स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी 1 जुलाई को बैठक कर इस प्रस्ताव के तौर-तरीकों पर चर्चा कर सकते हैं। यदि योजना लागू होती है तो छात्रों को शाकाहारी भोजन के साथ अंडा भी उपलब्ध कराया जा सकेगा।

अमित मालवीय ने क्या कहा?

बंगाल बीजेपी के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने कहा कि ISKCON को मिड-डे मील की जिम्मेदारी दिए जाने का विरोध “पूरी तरह बनावटी” है।

उन्होंने कहा, ISKCON वर्षों से देशभर में स्वच्छता और उच्च गुणवत्ता के साथ लाखों लोगों को भोजन उपलब्ध कराता रहा है। पश्चिम बंगाल में इसकी गहरी सांस्कृतिक जड़ें हैं, इसलिए इसे बाहरी संस्था बताना गलत है। बच्चे अपने घरों में अपनी पसंद का भोजन खाने के लिए स्वतंत्र हैं।

स्कूल प्रमुखों की क्या राय है?

कुछ स्कूल प्रधानाचार्यों का कहना है कि यदि छात्रों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलता है तो इस व्यवस्था से कोई विशेष समस्या नहीं होगी। उनका कहना है कि वर्तमान में भी मिड-डे मील के मेन्यू में सप्ताह में केवल एक दिन ही अंडा शामिल होता है।

इस मुद्दे पर अंतिम फैसला राज्य सरकार की आगामी बैठक के बाद सामने आ सकता है।

Shivangi Shukla

Shivangi.shukla95512@gmail.com

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