दिल्ली। एक ओर देश में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठ रही है। वहीं, उनके जन्मदिन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में लिखा, ‘केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में सराहनीय प्रयास कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य भारत को ज्ञान, शिक्षा और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाना है। मैं उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।’
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री की इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने शिक्षा मंत्री के प्रति नाराजगी व्यक्त की। कुछ लोगों ने उन्हें मौजूदा परिस्थितियों के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए इस्तीफे की मांग की, जबकि अन्य यूजर्स ने प्रधानमंत्री द्वारा दी गई शुभकामनाओं का समर्थन भी किया। कई पोस्टों में नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन और छात्रों से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया।
क्यों हो रहा है विरोध?
नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोपों के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान विपक्ष और कुछ छात्र संगठनों के निशाने पर हैं। प्रदर्शनकारी आरोप लगा रहे हैं कि परीक्षा प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। री-एग्जाम और परीक्षा प्रबंधन को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं।
कुछ राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन किए हैं। वहीं, विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों और परीक्षा प्रणाली में कथित खामियों के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए तथा परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाने चाहिए।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा से जुड़े विवादों पर अपनी ओर से प्रतिक्रिया देते हुए कुछ स्तर पर जिम्मेदारी स्वीकार करने की बात कही है और सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन भी दिया है। हालांकि, विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है और इस मामले में ठोस कार्रवाई तथा जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
फिलहाल इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है।



