आपकी पूँजी, आपका अधिकार: वित्तीय सशक्तिकरण की एक नई पहल

IEPFA द्वारा हाल ही में दिल्ली में आयोजित एक विशेष पैनल चर्चा में 'निवेशक सशक्तिकरण' और 'दावा-रहित वित्तीय संपत्तियों' को वापस पाने की प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम के दौरान “Claiming the Unclaimed: Unlocking the Potential of Idle Financial Assets in India” पुस्तक का विमोचन हुआ, जो निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए एक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करेगी। यह पहल देश में वित्तीय समावेशन को मजबूत करने और नागरिकों को उनकी अटकी हुई संपत्ति का अधिकार दिलाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

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नई दिल्ली – हाल ही में इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी (IEPFA) ने डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के समरसता ऑडिटोरियम में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पैनल चर्चा का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय था—“आपकी पूँजी, आपका अधिकार – लर्निंग एंड वे फॉरवर्ड”। इस कार्यक्रम ने नीति निर्माताओं, नियामकों, वित्तीय विशेषज्ञों और निवेशक जागरूकता समर्थकों को एक मंच पर लाकर एक ऐसे समावेशी वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र (Financial Ecosystem) की रूपरेखा तैयार की, जहाँ हर निवेशक अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित और सुलभ महसूस करे।

वित्तीय समावेश और निवेशक सुरक्षा का महत्व

भारत जैसे तेजी से बढ़ते आर्थिक तंत्र में, वित्तीय समावेशन केवल बैंक खाते खोलने तक सीमित नहीं है। इसका वास्तविक अर्थ है—निवेशकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें अपनी उन वित्तीय संपत्तियों (Financial Assets) तक पहुँच प्रदान करना जो किन्हीं कारणों से ‘दावा-रहित’ (Unclaimed) हो गई हैं। IEPFA का यह आयोजन इसी दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है।

इस कार्यक्रम के दौरान, “Claiming the Unclaimed: Unlocking the Potential of Idle Financial Assets in India” नामक एक महत्वपूर्ण पुस्तक का विमोचन किया गया। इसे श्रीमती दीप्ति गौर मुखर्जी (अध्यक्ष, IEPFA और सचिव, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय) और अन्य प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों द्वारा जारी किया गया। यह पुस्तक केवल एक प्रकाशन नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए एक ज्ञान का भंडार है जो अनक्लेम्ड संपत्तियों की पेचीदगियों को समझना चाहते हैं—चाहे वे नीति निर्माता हों, शोधकर्ता हों, वित्तीय संस्थान हों या स्वयं निवेशक।

पैनल चर्चा: चुनौतियाँ और समाधान की राह

कार्यक्रम के दौरान हुई विस्तृत चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि कैसे हम अपनी वित्तीय प्रणाली में ‘दावा-रहित’ संपत्तियों की समस्या को हल कर सकते हैं। पैनलिस्टों ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर अपने विचार रखे:

  • जागरूकता का अभाव: बहुत से निवेशकों को यह जानकारी ही नहीं होती कि उनका पैसा या शेयर अनक्लेम्ड की श्रेणी में आ गए हैं। इस पर व्यापक आउटरीच कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
  • तकनीकी समाधान: दावा प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के उपयोग को अनिवार्य बताया गया।
  • सामूहिक प्रयास: केवल सरकार या IEPFA के प्रयासों से यह संभव नहीं है। इसके लिए नियामकों (Regulators), वित्तीय संस्थानों और निवेशक सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता है।

श्रीमती अनीता शाह अकेल्ला (सीईओ, IEPFA और संयुक्त सचिव, कॉर्पोरेट मंत्रालय) ने अथॉरिटी की दूरदर्शिता को साझा करते हुए बताया कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को मजबूत कर रहे हैं ताकि प्रक्रिया इतनी पारदर्शी और आसान हो कि कोई भी आम नागरिक अपने परिवार की खोई हुई संपत्तियों को वापस पा सके।

मुख्य वक्तव्य और दृष्टिकोण

मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती दीप्ति गौर मुखर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि “निवेशक सशक्तिकरण ही वित्तीय समावेशन और आर्थिक विकास की वास्तविक नींव है।” उन्होंने जोर दिया कि नागरिक-केंद्रित सुधारों के माध्यम से ही हम उन संपत्तियों को वापस उनके असली मालिकों तक पहुँचा सकते हैं जो अभी तक सिस्टम में कहीं खोई हुई हैं।

वहीं, श्री एम. नागराजू (पूर्व सचिव, वित्तीय सेवा विभाग) ने वित्तीय प्रशासन को मजबूत करने और अनक्लेम्ड संपत्तियों से संबंधित समस्याओं को सुलझाने के लिए एक अधिक मजबूत और एकीकृत प्रणाली बनाने पर अपने बहुमूल्य सुझाव दिए।

IEPFA: क्या है इसकी भूमिका?

IEPFA, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत स्थापित एक संस्था है, जो पूरे भारत में निवेशक शिक्षा और संरक्षण कोष का प्रशासन करती है। इसका मुख्य उद्देश्य निवेशकों के हितों की रक्षा करना है। यह संस्था निम्नलिखित क्षेत्रों में कार्यरत है:

  • शेयरों का रिफंड।
  • दावा-रहित लाभांश (Dividends) को वापस दिलाना।
  • परिपक्व जमा (Matured Deposits) और डिबेंचरों का प्रबंधन।

यह संस्था लगातार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि निवेशकों का भरोसा वित्तीय संस्थानों पर बना रहे और वे अपने अधिकारों का लाभ उठा सकें।

निष्कर्ष: एक समावेशी भविष्य की ओर

“आपकी पूँजी, आपका अधिकार – लर्निंग एंड वे फॉरवर्ड” के इस आयोजन ने यह साबित कर दिया है कि भारत का वित्तीय तंत्र अब पहले से कहीं अधिक पारदर्शी और जागरूक होने की ओर अग्रसर है। जब हम अपनी निष्क्रिय (Idle) संपत्तियों को सक्रिय करते हैं, तो हम न केवल खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बनाते हैं, बल्कि राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में भी अपना योगदान देते हैं।

यह कार्यक्रम एक स्पष्ट संदेश है—आपकी पूँजी, आपका अधिकार है। अपनी संपत्तियों के प्रति सजग रहें, नवीनतम जानकारी रखें और यदि आपका कोई दावा बकाया है, तो IEPFA के माध्यम से उसे पुनः प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू करें।

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Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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