श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर: आज भारत के ग्रामीण परिदृश्य में एक क्रांतिकारी बदलाव की लहर दौड़ रही है। श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर (SKICC) में आयोजित ‘सेवा से समृद्धि: पंचायत-आधारित सेवा वितरण’ पर क्षेत्रीय कार्यशाला ने इस बदलाव को एक नई दिशा दी है। पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल डिजिटल इंडिया के सपनों को साकार करने का एक मंच बना, बल्कि जमीनी स्तर पर सुशासन की एक नई गाथा भी लिखी।
एक नई डिजिटल क्रांति: कार्यशाला का परिचय
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में सात राज्यों—हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों को केवल प्रशासनिक इकाइयों के बजाय ‘डिजिटल सेवा वितरण के केंद्र’ के रूप में स्थापित करना था।
इस कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के कॉमन सर्विस सेंटर (CSC-SPV) और जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की सहभागिता ने इसे और भी प्रभावी बना दिया। यह कार्यशाला ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जहाँ तकनीक और जनभागीदारी का अनूठा संगम देखने को मिला।
सुशासन का ‘पीपल फर्स्ट’ दृष्टिकोण
उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा ने अपने संबोधन में ‘पीपल फर्स्ट’ (लोग पहले) के दृष्टिकोण पर जोर दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि कैसे जम्मू-कश्मीर में ऑनलाइन जन-सेवाओं का दायरा 2020 में कुछ दर्जन सेवाओं से बढ़कर आज 1,100 से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा:
- 98% डिजिटल कनेक्टिविटी: आज अधिकांश पंचायतें डिजिटल रूप से जुड़ी हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है।
- बदलाव का आधार: ‘बैक टू विलेज’ और ‘ब्लॉक दिवस’ जैसी पहल ने शिकायतों के निवारण और विकास कार्यों को सीधे जनता से जोड़ दिया है।
- विकास की नींव: पंचायती राज संस्थानों (PRIs) को वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार देकर उन्हें सशक्त बनाया गया है।
तकनीक का जादू: eGramSwaraj और SabhaSaar
पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज ने उन तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डाला जो आज ग्रामीण भारत की कार्यप्रणाली को बदल रहे हैं:
- eGramSwaraj का विस्तार: लगभग 2.5 लाख ग्राम पंचायतें अब अपनी योजनाएँ बनाने, लेखा-जोखा रखने और ऑडिट करने के लिए इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रही हैं। PFMS के साथ एकीकरण के माध्यम से अब तक ₹3 लाख करोड़ से अधिक की राशि का पारदर्शी भुगतान किया जा चुका है।
- AI-आधारित SabhaSaar: यह एक अद्भुत नवाचार है। यह एप्लिकेशन ग्राम सभा की कार्यवाही को 23 भारतीय भाषाओं में तुरंत रिकॉर्ड और सारांशित कर सकता है। लगभग 1.5 लाख पंचायतें इसे अपना चुकी हैं, जिससे भाषाई बाधा दूर हुई है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया और समावेशी बनी है।
नवाचार और सम्मान: सफलता की कहानियाँ
इस कार्यशाला में केवल चर्चाएँ ही नहीं हुईं, बल्कि जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया गया।
- सर्वश्रेष्ठ पंचायतें: जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले की ‘पंडितपोरा’ और कर्नाटक के कोडागु जिले की ‘हुडीकेरी’ ग्राम पंचायतों को सेवा वितरण में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कृत किया गया।
- VLEs का योगदान: सात राज्यों के उन ‘विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर्स’ (VLEs) को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने अंतिम छोर तक डिजिटल सेवाओं को पहुँचाने में कड़ी मेहनत की है।
भविष्य की राह: आत्मनिर्भर पंचायतें
कार्यक्रम में ‘ग्राम नवाचार प्रयोगशालाओं’ (Village Innovation Labs) की स्थापना पर विशेष जोर दिया गया। श्री मनोज सिन्हा ने महिलाओं की स्थानीय शासन में भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि पंचायतें विकास का एक समावेशी मॉडल बन सकें।
यह कार्यशाला इस बात का प्रमाण है कि भारत के गाँव अब पीछे नहीं हैं। वे तकनीक को अपनाकर अपनी नियति स्वयं लिख रहे हैं। ‘सेवा से समृद्धि’ का यह मंत्र आने वाले समय में न केवल सेवा वितरण को बेहतर बनाएगा, बल्कि भारत के ग्रामीण लोकतंत्र को और अधिक जीवंत, पारदर्शी और सशक्त बनाएगा।



