भारत का ‘मिशन’ और खनिजों की नई क्रांति: 56 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी

खान मंत्रालय ने 56 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स और 11 एक्सप्लोरेशन लाइसेंस ब्लॉक्स की सफल नीलामी के साथ भारत की खनिज सुरक्षा और अन्वेषण पारिस्थितिकी तंत्र को नई मजबूती प्रदान की है। यह पहल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

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नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश की आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा को एक नई दिशा देने का साहसी निर्णय लिया है। हाल ही में, खान मंत्रालय ने महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 56 क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की सफल नीलामी ने भारत की घरेलू खनिज आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती प्रदान की है। यह केवल आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ है।

नीलामी की ऐतिहासिक सफलता: क्या है इसका महत्व?

खान मंत्रालय ने हाल ही में सातवें चरण के तहत 10 और क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स की सफल नीलामी की है। इसके साथ ही, अब तक कुल 56 ब्लॉक्स का आवंटन हो चुका है। सरकार ने नीलामी के लिए 88 अद्वितीय खनिज ब्लॉक्स को चिह्नित किया था, जिसमें से 63% से अधिक की सफलता दर भारत की खनिज क्षमता में उद्योग जगत के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।

नए क्षेत्रों में विस्तार और खनिजों की विविधता

सातवें चरण की नीलामी की सबसे खास बात यह रही कि इसमें पहली बार गुजरात, उत्तराखंड और तेलंगाना जैसे राज्यों को शामिल किया गया। इस प्रक्रिया ने न केवल भौगोलिक विस्तार किया, बल्कि इसमें ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE), वैनेडियम, टाइटेनियम, ग्लूकोनाइट और रॉक फॉस्फेट जैसे अत्यंत दुर्लभ और महत्वपूर्ण खनिजों को भी शामिल किया। 23 मार्च, 2026 को जारी निविदा (NIT) के साथ शुरू हुई यह प्रक्रिया खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 और खनिज (नीलामी) नियम, 2015 के प्रावधानों के अंतर्गत पूरी की गई।

एक्सप्लोरेशन लाइसेंस (EL): अन्वेषण के नए द्वार

क्रिटिकल खनिजों के साथ-साथ, मंत्रालय ने एक्सप्लोरेशन लाइसेंस (EL) के दूसरे चरण को भी सफलतापूर्वक पूरा किया है। भारत में अब कुल 11 एक्सप्लोरेशन लाइसेंस ब्लॉक्स नीलाम हो चुके हैं। इस बार इस लाइसेंस ढांचे का विस्तार अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओडिशा तक किया गया है, जो गहरे स्तर पर छिपे खनिजों की खोज के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को एक बेहतर अवसर प्रदान करता है।

क्यों जरूरी है यह ‘मिशन’?

आज के दौर में, जब दुनिया स्वच्छ ऊर्जा और तकनीकी श्रेष्ठता की दौड़ में लगी है, तब क्रिटिकल मिनरल किसी भी देश की रीढ़ हैं।

  • क्लीन एनर्जी और ईवी: इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की बैटरी, सौर पैनल और पवन चक्की के लिए इन खनिजों की भारी मांग है।
  • रक्षा और तकनीक: रक्षा उपकरण, उन्नत विनिर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पूरी तरह से इन्हीं खनिजों पर निर्भर हैं।
  • आयात पर निर्भरता में कमी: वर्तमान में भारत कई महत्वपूर्ण खनिजों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है। इस मिशन का उद्देश्य न केवल घरेलू उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि आयात पर निर्भरता को कम कर भारत को ग्लोबल हब बनाना है।

सरकार की दूरदर्शिता

राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) का उद्देश्य स्पष्ट है—एक मजबूत, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना। खान मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वे निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्राथमिकता देते हुए देश में खनिज संपदा के दोहन के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। राज्य सरकारों, तकनीकी एजेंसियों और उद्योग के सहयोग ने इस कार्यक्रम को एक जन-आंदोलन का रूप दे दिया है।

भविष्य की तकनीक में क्रिटिकल मिनरल्स का रणनीतिक महत्व

भविष्य की अर्थव्यवस्था का इंजन ‘स्वच्छ ऊर्जा’ और ‘उन्नत प्रौद्योगिकी’ होगा। इन दोनों के लिए लिथियम (Lithium), कोबाल्ट (Cobalt), निकल (Nickel), और रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) जैसे खनिज अनिवार्य हैं।

1. स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का आधार

भारत का ‘नेट-जीरो’ लक्ष्य और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने की नीति पूरी तरह से इन खनिजों पर टिकी है।

  • बैटरी तकनीक: लिथियम-आयन बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों की सबसे महंगी और महत्वपूर्ण घटक है। बिना लिथियम और ग्रेफाइट के, ईवी क्रांति असंभव है।
  • ऊर्जा भंडारण (Energy Storage): सौर और पवन ऊर्जा रुक-रुक कर मिलने वाली ऊर्जा है। इसे स्टोर करने के लिए बड़े पैमाने पर बैटरी बैकअप की आवश्यकता होती है, जिसके लिए इन खनिजों का उपयोग अपरिहार्य है।

2. रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र (Defense & Aerospace)

आधुनिक रक्षा उपकरण, जैसे कि मिसाइल मार्गदर्शन प्रणाली, रडार, और लड़ाकू विमान, अत्यधिक जटिल इलेक्ट्रॉनिक्स से बने होते हैं।

  • रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE): इनका उपयोग विमानों के इंजन, निर्देशित हथियारों और उपग्रहों के निर्माण में किया जाता है। भारत के अंतरिक्ष मिशन (जैसे ISRO के मिशन) की सफलता के लिए इन खनिजों की घरेलू आपूर्ति आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

3. उन्नत विनिर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स (Advanced Manufacturing)

  • सेमीकंडक्टर और चिप्स: आधुनिक चिप्स बनाने के लिए विभिन्न दुर्लभ धातुओं की आवश्यकता होती है। चूंकि भारत ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ पर जोर दे रहा है, इसलिए कच्चे माल की सुरक्षा देश के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
  • डिजिटल अर्थव्यवस्था: 6G तकनीक, एआई (AI) हार्डवेयर और सुपरकंप्यूटिंग के लिए उच्च गुणवत्ता वाले खनिजों की आवश्यकता होती है, जो उच्च तापीय चालकता और अन्य भौतिक गुणों के कारण अद्वितीय होते हैं।

4. आर्थिक सुरक्षा और वैश्विक स्थिति

वर्तमान में, चीन जैसे देश इन खनिजों की प्रोसेसिंग और आपूर्ति श्रृंखला पर हावी हैं। भारत के लिए इन खनिजों का सफल खनन और प्रसंस्करण (Processing) करना निम्नलिखित लाभ प्रदान करेगा:

  • आयात बिल में कमी: भारत हर साल अरबों डॉलर के खनिज आयात करता है। घरेलू उत्पादन से विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
  • ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की स्थिति: यदि भारत इन खनिजों के खनन और शोधन में महारत हासिल करता है, तो वह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक विश्वसनीय भागीदार (Reliable Partner) बन सकता है।

निष्कर्ष

आने वाले समय में, ये खनिज “21वीं सदी का तेल” (Oil of the 21st Century) साबित होंगे। जिस तरह 20वीं सदी में तेल की उपलब्धता ने देशों की शक्ति तय की थी, वैसे ही आने वाले दशकों में इन खनिजों का नियंत्रण और सुलभता ही किसी देश की औद्योगिक और तकनीकी शक्ति का पैमाना होगी। भारत का ‘क्रिटिकल मिनरल मिशन’ इसी रणनीतिक भविष्य की तैयारी है।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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