नई दिल्ली | इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ एक ऐसी कहानी है जो दर्शकों की भावनाओं को गहराई से छूती है। यह सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं है, बल्कि भारत के बंटवारे के दर्द और उससे बिछड़ गए लोगों की पीड़ा को भी सामने लाती है। फिल्म देखने के बाद ऐसा महसूस होता है कि उस दौर का दर्द आपका अपना दर्द बन गया हो।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत Naseeruddin Shah का शानदार अभिनय है। 50 साल से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने कई यादगार किरदार निभाए हैं, लेकिन इस फिल्म में उनका काम एक बार फिर साबित करता है कि वह भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन कलाकारों में से एक हैं।
फिल्म की कहानी दो अलग-अलग समय की घटनाओं को दिखाती है। साल 2026 में सरदार ईश्वर सिंह अपनी जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर हैं। लेकिन उनका मन आज भी सरगोधा में अटका हुआ है, जहां उन्होंने अपनी जवानी बिताई थी। उस समय उन्हें कीनू के नाम से जाना जाता था और जिया के साथ उनकी प्रेम कहानी आगे बढ़ रही थी। तभी भारत का बंटवारा हो गया और दोनों एक-दूसरे से बिछड़ गए।
95 साल के ईश्वर सिंह को अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए अपने पुराने दिन, अपना प्यार और जिया से किया वादा याद आता है। ईश्वर सिंह के युवा रूप को वेदांग रैना ने भी अच्छी तरह निभाया है, लेकिन एक बुजुर्ग इंसान के भीतर छिपे दर्द, पछतावे और भावनाओं को नसीरुद्दीन शाह ने बेहद प्रभावशाली तरीके से दिखाया है।
सिर्फ आंखों से दिखाया दर्द
फिल्म में नसीरुद्दीन शाह बंटवारे के दर्द, बिछड़ते परिवारों और टूटे रिश्तों की कहानी को अपनी अदाकारी से जीवंत कर देते हैं। सबसे खास बात यह है कि उन्होंने 95 साल के व्यक्ति का किरदार निभाया है, जबकि उनकी वास्तविक उम्र इससे काफी कम है।
पूरी फिल्म में उनका किरदार अस्पताल के बिस्तर तक सीमित है। ऐसे में उनके पास बॉडी लैंग्वेज का ज्यादा सहारा नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने सिर्फ अपने चेहरे के भाव और आंखों के जरिए ईश्वर सिंह के हर दर्द, हर याद और हर भावना को दर्शकों तक पहुंचाया है। यही उनकी अभिनय कला की सबसे बड़ी ताकत है।



