दिल्ली के उपराज्यपाल टी.एस.सिंह संधू ने आज ‘एआई फॉर गुड गवर्नेंस यानी सुशासन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित किया। इसअवसर पर ‘रामभाऊ म्हाळगी प्रबोधिनी’ के अध्यक्ष, DICCI के चेयरमैन सहित प्रमुख शिक्षाविद्, उद्योग जगत के नेता और एआई (AI) समुदाय के विशिष्ट सदस्य उपस्थित रहे। तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य पर बात करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत के मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के सहारे शासन व्यवस्था को ‘प्रक्रिया-संचालित से प्लेटफॉर्म-संचालित बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

एआई मानव केंद्रित
उपराज्यपाल ने एक मौलिक मानव-केंद्रित दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि एआई प्रणालियों को हमेशा संवेदनशील होना चाहिए और सभी नागरिकों के कल्याण के लिए काम करना चाहिए। भारत जैसे विविध देश में एआई का क्रियान्वयन किसी अन्य देश के संदर्भों या मॉडलों पर निर्भर नहीं रह सकता। जमीनी स्तर पर सच्चे सशक्तिकरण और समावेश को सुनिश्चित करने के लिए एआई को देश की गहरी भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक जटिलताओं को संबोधित करने के लिए बेहद बारीकी से डिज़ाइन किया जाना चाहिए।
दिल्ली जैसे महानगर के व्यावहारिक शासन आयामों को रेखांकित करते हुए एलजी ने कहा कि एआई में जटिल समन्वय और दक्षता संबंधी चुनौतियों को हल करने की अपार क्षमता है।जैसे-जैसे सरकारी प्रणालियाँ डेटा-समृद्ध हो रही हैं, एआई का उपयोग मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में किया जाना चाहिए
यातायात प्रबंधन
बुनियादी ढांचे का रखरखाव
पर्यावरण की निगरानी
त्वरित शिकायत निवारण
सार्वजनिक विश्वास और डेटा सुरक्षा
अपने संबोधन के समापन में एलजी ने कहा कि किसी भी तकनीकी व्यवस्था की सफलता जनता के विश्वास पर निर्भर करती है। उन्होंने डेटा सुरक्षा, निजता संरक्षण और पारदर्शी जवाबदेही तंत्र को AI के उपयोग के लिए अनिवार्य बताया। साथ ही उन्होंने नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों से अपील की कि AI को इस प्रकार लागू किया जाए जिससे सुशासन मजबूत हो, संस्थागत जवाबदेही बनी रहे और जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो।



