नई दिल्ली: आज का दौर कृषि के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है। किसान भाई-बहन हर सीजन में एक ही चिंता के साथ खेती शुरू करते हैं—क्या बारिश सही होगी? क्या सूखा पड़ेगा? क्या कीड़े फसल बर्बाद कर देंगे? इन जलवायु अनिश्चितताओं के बीच, बीज का अंकुरण और फसल की शुरुआती मजबूती (Crop Establishment) ही तय करती है कि साल के अंत में जेब में कितना मुनाफा होगा।
भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIOR), हैदराबाद ने इस समस्या को जड़ से समझने के बाद एक ऐसी अद्भुत तकनीक विकसित की है, जिसे हम ‘स्मार्ट सीड कोटिंग टेक्नोलॉजी’ कह रहे हैं। यह सिर्फ एक प्रयोग नहीं, बल्कि आने वाले समय की ‘जलवायु-सहनशील’ (Climate-Resilient) खेती की आधारशिला है।
क्या है यह ‘स्मार्ट सीड कोटिंग’ तकनीक?
सरल शब्दों में समझें, तो यह बीज के ऊपर लगाई गई एक ऐसी ‘सुरक्षा परत’ है जो उसे सुपर-सीड में बदल देती है।
- बायोपॉलिमर की सुरक्षा: यह पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल (biodegradable) सामग्री से बनी परत है।
- बीज-मिट्टी का मिलन (Seed-Soil Interface): यह परत बीज के चारों ओर एक ऐसा सूक्ष्म-वातावरण (Micro-environment) बनाती है जहाँ बीज को हर वह चीज मिलती है जिसकी उसे शुरुआत में जरूरत होती है।
- क्या-क्या है इसमें? इस परत के अंदर सूक्ष्म पोषक तत्व (micronutrients), फसल की रक्षा करने वाले मित्र सूक्ष्मजीव (beneficial microbes), और पौधों की वृद्धि को तेज करने वाले तत्व शामिल होते हैं।
यह तकनीक खेती में कैसे बदलाव ला रही है?
1. पैदावार में जबरदस्त बढ़ोतरी
ICAR-IIOR द्वारा किए गए फील्ड परीक्षणों के आंकड़े बताते हैं कि सोयाबीन, मक्का, मूंगफली, सरसों और चना जैसी फसलों में उपज में 12% से लेकर 37% तक की वृद्धि देखी गई है। यह मुनाफा किसी भी किसान की आर्थिक स्थिति को बदलने के लिए काफी है।
2. तनाव के खिलाफ ढाल
बारिश में देरी हो या नमी की कमी, ये ‘स्मार्ट बीज’ कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अंकुरित होने की क्षमता रखते हैं। यह तकनीक उन इलाकों के लिए वरदान है जहाँ सिंचाई के साधन सीमित हैं और खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर है।
3. पोषक तत्वों का सही इस्तेमाल
अक्सर किसान खाद का छिड़काव ऊपर से करते हैं, जिसका एक बड़ा हिस्सा बर्बाद हो जाता है। स्मार्ट कोटिंग सीधे बीज के पास पोषक तत्व पहुँचाती है, जिससे खाद की बर्बादी कम होती है और पौधे की सेहत तेजी से सुधरती है।
यह तकनीक हमारे देश के लिए क्यों जरूरी है?
भारत एक कृषि प्रधान देश है जहाँ की अधिकांश खेती वर्षा आधारित (Rainfed) है। यहाँ जलवायु परिवर्तन का सबसे गहरा असर पड़ता है।
- संसाधन दक्षता (Resource Efficiency): यह तकनीक सीमित संसाधनों में अधिकतम उपज लेने में मदद करती है।
- खाद्य सुरक्षा: यह तकनीक न केवल किसानों का मुनाफा बढ़ाती है, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक मजबूती में भी अपना योगदान देती है।
- बहुआयामी उपयोग: यह केवल एक फसल के लिए नहीं, बल्कि मोटे अनाज (Millets), दालों, तिलहन, और बागवानी फसलों के लिए भी उतनी ही प्रभावी है।
अब आगे क्या? किसानों तक पहुँच कैसे बनेगी?
ICAR-IIOR इस तकनीक को प्रयोगशाला से निकालकर सीधे आपके खेत तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए सार्वजनिक और निजी बीज कंपनियों, राज्य बीज निगमों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के साथ मिलकर व्यापक स्तर पर इसे प्रसारित किया जा रहा है।
हमारा लक्ष्य है कि आने वाले समय में देश का हर किसान अपनी बुवाई में इस ‘स्मार्ट कोटिंग’ का उपयोग करे ताकि खेती एक ‘रिस्क’ नहीं, बल्कि एक ‘मुनाफे का जरिया’ बने।
किसान भाइयों और कृषि प्रेमियों के लिए संदेश
खेती का मतलब अब सिर्फ पसीना बहाना नहीं, बल्कि स्मार्ट तकनीकों को अपनाकर कम मेहनत और कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाना है। ‘स्मार्ट सीड’ इसी बदलाव का नाम है। यदि आप भी अपनी आने वाली फसल को सुरक्षित और अधिक उत्पादक बनाना चाहते हैं, तो अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्रों या बीज वितरण केंद्रों पर इस तकनीक के बारे में जरूर जानकारी लें।



