राहुल गांधी का ‘कोटा कूच’, क्या मोदी सरकार के लिए बढ़ने वाली हैं मुश्किलें?

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नई दिल्ली | लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने NEET पेपर लीक और परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नया राजनीतिक अभियान शुरू कर दिया है। 17 जून को राजस्थान के कोटा में आयोजित कार्यक्रम के जरिए कांग्रेस ने छात्रों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की रणनीति बनाई है।

कांग्रेस का यह अभियान मुख्य रूप से NEET पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर केंद्रित है। हालांकि, पार्टी इसे सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित न रखकर शिक्षा व्यवस्था और रोजगार से जुड़े व्यापक मुद्दों से जोड़ने की भी कोशिश कर रही है।

पहले से गरम है माहौल

कांग्रेस का यह आंदोलन ऐसे समय में शुरू हुआ है जब कई छात्र संगठन और सामाजिक समूह पहले से ही पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग उठा रहे हैं। इसी क्रम में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नामक संगठन भी NEET और पेपर लीक के मुद्दे पर सक्रिय रहा है।

CJP ने 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर से विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके देशभर में अभियान चला रहे हैं। हाल ही में जयपुर में एक प्रदर्शन के दौरान उन पर कुछ युवकों द्वारा हमला भी किया गया था । संगठन की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष को सरकार पर दबाव बनाने का एक नया अवसर मिला है।

कोटा से राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत

राहुल गांधी ने कोटा कार्यक्रम से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था कि देश में मेहनत करने वाले युवाओं को बार-बार पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे लाखों छात्रों के सपनों पर चोट बताया।

कांग्रेस ने इस कार्यक्रम को “छात्रों की गूंज” नाम दिया। पार्टी का दावा है कि इसका उद्देश्य छात्रों की समस्याओं को सुनना और उन्हें राष्ट्रीय मंच देना है। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसे पारंपरिक राजनीतिक रैली की बजाय संवाद कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, राहुल गांधी ने कई घंटे छात्रों के बीच बिताए और उनकी समस्याओं को सुना।

क्यों चुना गया कोटा?

देशभर में कोटा की पहचान मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के सबसे बड़े केंद्र के रूप में है। हर साल लाखों छात्र यहां NEET और JEE जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। राहुल गांधी इससे पहले भी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कोटा में छात्रों से मुलाकात कर चुके हैं। कांग्रेस का मानना है कि छात्रों और युवाओं के मुद्दों को उठाने के लिए कोटा एक प्रतीकात्मक और प्रभावशाली स्थान है।

दिल्ली, प्रयागराज और पटना तक पहुंचेगा अभियान

कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के अनुसार, कोटा के बाद 10 जुलाई को प्रयागराज, 11 जुलाई को पटना और 14 जुलाई को दिल्ली में छात्र सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का कहना है कि इन सम्मेलनों में प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों, शिक्षकों, युवा संगठनों और पेपर लीक जैसी घटनाओं से प्रभावित लोगों को एक मंच पर लाया जाएगा।

कांग्रेस का मानना है कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे युवाओं के बीच बड़ा राजनीतिक विषय बन सकते हैं। वहीं, यह देखना दिलचस्प होगा कि राहुल गांधी का यह अभियान जमीन पर कितना असर छोड़ता है और क्या यह मोदी सरकार के खिलाफ व्यापक जन आंदोलन का रूप ले पाता है या फिर कोटा तक ही सीमित रह जाता है।

Meenu Rautela

Meenunewwork@gmail.com

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