नई दिल्ली। संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण को लेकर जोरदार बहस जारी है। संशोधन से जुड़े विधेयक पर शुक्रवार को चर्चा समाप्त होने के बाद वोटिंग कराई जाएगी। इस बीच केंद्र सरकार ने 2023 के महिला आरक्षण कानून को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।
आधी रात जारी हुई अधिसूचना
संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर देर रात तक चर्चा चली। इसके बाद केंद्रीय विधि मंत्रालय ने गुरुवार रात अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि महिला आरक्षण अधिनियम 2023 अब प्रभावी हो गया है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
अधिसूचना जारी होने के बाद लोकसभा में विपक्षी सांसदों ने हंगामा किया। डीएमके सांसद कनिमोझी ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब विधेयक पर चर्चा जारी थी, तब इसे अधिसूचित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी इस कदम को “विचित्र” बताया और कहा कि बहस के बीच कानून लागू करना हैरान करने वाला है। सूत्रों के अनुसार, यह कदम तकनीकी और प्रक्रियागत कारणों से उठाया गया है। सरकार का कहना है कि 2023 के कानून को अधिसूचित करना आवश्यक था, ताकि उसमें संशोधन किया जा सके।
क्या है पूरा मामला
महिला आरक्षण अधिनियम 2023 के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है। इस कानून के अनुसार आरक्षण लागू करने के लिए नई जनगणना और परिसीमन आवश्यक है। वर्तमान संशोधन विधेयक में प्रस्ताव है कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर आरक्षण लागू किया जाए, जिससे इसे जल्द प्रभावी बनाया जा सके।
सरकार ने जारी की अधिसूचना
जारी अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार ने संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत 16 अप्रैल, 2026 से इस कानून को लागू करने की घोषणा की है। उल्लेखनीय है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम सितंबर 2023 में संसद द्वारा पारित किया गया था।संसद में जारी बहस के बाद शुक्रवार को इस संशोधन विधेयक पर वोटिंग कराई जाएगी, जिस पर सभी दलों की नजरें टिकी हैं।



