नई दिल्ली: बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले जदयू नेता नीतीश कुमार ने शुक्रवार, 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें सदन की सदस्यता की शपथ दिलाई। 16 मार्च को ऊपरी सदन के लिए चुने जाने के लगभग एक महीने बाद नीतीश कुमार अब औपचारिक रूप से संसद के सदस्य बन गए हैं।
नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के साथ ही बिहार में एक राजनीतिक युग का अंत होता दिख रहा है। हालांकि, उन्होंने अभी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद अब राज्य में नए चेहरे के लिए रास्ता साफ हो गया है। संवैधानिक नियमों के अनुसार, सांसद चुने जाने के बाद उन्हें 14 दिनों के भीतर विधान परिषद से इस्तीफा देना था, जो उन्होंने 30 मार्च को ही कर दिया था।
कब देंगे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा?
बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार दिल्ली से पटना लौटने के बाद अगले 2 से 4 दिनों में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इस्तीफे से पहले वह एनडीए के विधायकों के साथ बैठक करेंगे और नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी स्पष्ट किया है कि नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति को लेकर एनडीए गठबंधन के भीतर कोई मतभेद नहीं है।
दिल्ली में बैठकों का दौर जारी
नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण के बीच, दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेताओं की एक उच्च स्तरीय बैठक भी चल रही है, जिसमें बिहार के नए नेतृत्व और भविष्य की रणनीति पर मंथन किया जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि नीतीश कुमार की अनुपस्थिति में बिहार की कमान किसी नए और प्रभावशाली चेहरे को सौंपी जा सकती है।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर
नीतीश कुमार का राजनीतिक करियर शानदार रहा है। 1985 में पहली बार विधायक के रूप में अपनी यात्रा शुरू करने वाले नीतीश, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे। साल 2005 में वह पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने और तब से लेकर अब तक वह राज्य के विकास और राजनीतिक धुरी बने रहे। जेडीयू नेता सराओगी ने उनके शपथ ग्रहण पर कहा कि यह बिहार के लिए एक ऐतिहासिक दिन है और नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही राज्य ने ‘जंगल राज’ से मुक्ति पाकर प्रगति की राह पकड़ी है।




