नई दिल्ली : मध्य पूर्व में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्षविराम (सीजफायर) के बावजूद इजरायल ने लेबनान पर अपने हवाई हमले और तेज कर दिए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये हमले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस निजी अपील के बाद भी जारी रहे, जिसमें उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से सैन्य कार्रवाई को ‘कम करने’ का आग्रह किया था।
इजरायली लड़ाकू विमानों ने शुक्रवार को लेबनान के कम से कम दो कस्बों को निशाना बनाया। इससे पहले बुधवार को मध्य बेरूत के घनी आबादी वाले व्यापारिक और रिहायशी इलाकों में बिना किसी चेतावनी के किए गए हमले ने दुनिया को दहला दिया था। उस भीषण हमले में कम से कम 300 लोगों की मौत हो गई और 1,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इजरायल के इस आक्रामक रुख ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों पर सवालिया निशान लगा दिया है।
जवाब में, लेबनान स्थित सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह ने भी उत्तरी इजरायल पर रॉकेट दागकर पलटवार किया है। हिजबुल्लाह ने दावा किया कि उसने किर्यात शमोना और ऊपरी गैलिली के मिसगाव आम क्षेत्र में रॉकेट हमले किए हैं। समूह ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि उनकी जवाबी कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक “इजरायली-अमेरिकी आक्रामकता” पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती।
वर्तमान तनाव के केंद्र में सीजफायर की शर्तों को लेकर पैदा हुआ भ्रम है। ईरान का दावा है कि अमेरिका के साथ हुए दो हफ्ते के समझौते में लेबनान में भी युद्ध विराम की बात शामिल थी। हालांकि, इजरायल और स्वयं अमेरिका ने इस दावे को खारिज कर दिया है। 1948 में इजरायल की स्थापना के बाद से ही दोनों देश तकनीकी रूप से युद्ध की स्थिति में रहे हैं, लेकिन हालिया हताहतों की संख्या ने इस संघर्ष को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है।
वैश्विक समुदाय अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप का दबाव नेतन्याहू सरकार की नीतियों में कोई बदलाव ला पाएगा, या फिर यह क्षेत्रीय युद्ध एक बड़े संकट का रूप ले लेगा।



