नई दिल्ली : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक दिलचस्प वीडियो साझा किया है, जिसमें आर्टेमिस II मून मिशन के दौरान ओरियन स्पेसक्राफ्ट में आई एक अनोखी तकनीकी खराबी का जिक्र किया गया है। मिशन के दौरान स्पेसक्राफ्ट का टॉयलेट अचानक खराब हो गया, जिसे अंतरिक्ष यात्रियों ने अपनी सूझबूझ से ठीक किया। अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण यह एक बड़ी चुनौती बन गई थी।
यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम क्या है
ओरियन स्पेसक्राफ्ट में लगे इस टॉयलेट को ‘यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम’ कहा जाता है। यह सिस्टम हवा के तेज बहाव के जरिए काम करता है। सामान्य परिस्थितियों में यूरिन को एक टैंक में जमा किया जाता है और क्रू मेंबर्स उसे रोजाना डिस्पोज करते हैं। लेकिन तकनीकी खराबी के कारण एयरफ्लो रुक गया, जिससे टॉयलेट इस्तेमाल के लायक नहीं रहा। स्थिति इतनी गंभीर थी कि क्रू को रात भर ‘कंटिंजेंसी कलेक्शन यूनिट्स’ का सहारा लेना पड़ा।
क्या हुई समस्या
नासा के अनुसार, समस्या तब आई जब यूरिन को वैक्यूम में डिस्पोज किया जा रहा था। अंतरिक्ष के शून्य तापमान में तरल पदार्थ के जमने (फ्रीजिंग) से “बर्फ के तूफान” जैसी स्थिति पैदा हो गई। एस्ट्रोनॉट्स ने इसे एक जटिल इंजीनियरिंग समस्या बताया, क्योंकि वैक्यूम में गंदे तरल पदार्थ का व्यवहार शुद्ध पानी से बिल्कुल अलग और अनिश्चित होता है।
क्रिस्टीना हैमक कोच ने संभाली कमान
इस मुश्किल घड़ी में महिला एस्ट्रोनॉट क्रिस्टीना हैमक कोच ने कमान संभाली। उन्होंने न केवल समस्या को पहचाना बल्कि उसे सफलतापूर्वक ठीक भी किया। क्रिस्टीना ने मजाकिया लहजे में खुद को “स्पेस प्लंबर” बताया। जांच में पता चला कि मोटर में कुछ फंसने के बजाय यह ‘प्राइमिंग’ की एक छोटी सी तकनीकी दिक्कत थी।
नासा का मानना है कि आर्टेमिस III मिशन, जिसके जरिए इंसानों को फिर से चंद्रमा पर भेजने की तैयारी है, उससे पहले इस तरह की समस्याओं का सामने आना अच्छा है। इससे भविष्य के मिशनों को अधिक सुरक्षित और त्रुटिहीन बनाने में मदद मिलेगी। जैसा कि एक अंतरिक्ष यात्री ने चुटकी लेते हुए कहा, “स्पेसक्राफ्ट में शायद स्पेस टॉयलेट ही सबसे जरूरी चीज है।”



