नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के भीतर मची आंतरिक कलह अब खुलकर सामने आ गई है। राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा द्वारा अपनी ही पार्टी पर लगाए गए आरोपों पर ‘आप’ ने तीखा पलटवार किया है। दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज और पार्टी नेता अनुराग ढांडा ने चड्ढा पर “डरपोक राजनीति” करने और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया है।
समोसे की नहीं, देश बचाने की बात करें
सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि आम आदमी पार्टी अरविंद केजरीवाल के उन सिपाहियों की है जो “जो डर गया, समझो मर गया” के सिद्धांत पर चलते हैं।
भारद्वाज ने राघव चड्ढा पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद में पार्टी को मिलने वाला सीमित समय जनता के बड़े मुद्दों के लिए होता है, न कि “एयरपोर्ट कैंटीन में समोसे सस्ते करवाने” जैसे सॉफ्ट पीआर के लिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब विपक्ष ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्ताव लाने की कोशिश की, तो चड्ढा ने उस पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।
Just saw ur video Raghav bhai.
— Saurabh Bharadwaj (@Saurabh_MLAgk) April 3, 2026
I just want to say – “जो डर गया, समझो मर गया” pic.twitter.com/cgXN9cI4aG
मुश्किल समय में साथ छोड़ने का आरोप
पार्टी ने राघव चड्ढा की वफादारी पर भी सवाल उठाए हैं। सौरभ भारद्वाज ने याद दिलाया कि जब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया, तब राघव चड्ढा देश से बाहर थे। उन्होंने कहा, “जब गुजरात में हमारे 160 कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और उन्हें जेल भेजा गया, तब सांसद साहब चुप रहे।” अनुराग ढांडा ने भी सुर मिलाते हुए कहा कि पिछले कुछ सालों से राघव सरकार के खिलाफ बोलने से घबरा रहे हैं और सदन में पार्टी के वॉकआउट के फैसले का भी समर्थन नहीं करते।
राघव चड्ढा का पक्ष
इससे पहले राघव चड्ढा ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी व्यथा साझा की थी। उन्होंने दावा किया कि पार्टी ने राज्यसभा में उनके बोलने पर रोक लगाने की कोशिश की है ताकि उनकी आवाज दबाई जा सके।
चड्ढा ने भावुक होते हुए कहा कि वह आम आदमी के मुद्दों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और पद से हटाया जाना उनकी हार नहीं है। हालांकि, पार्टी के शीर्ष नेताओं के कड़े रुख से साफ है कि राघव और ‘आप’ के बीच की दूरियां अब काफी बढ़ चुकी हैं।



