नयी दिल्ली: मध्य-पूर्व में जारी ईरान युद्ध का असर अब आम लोगों की जिंदगी से जुड़े उत्पादों पर भी दिखने लगा है। कंडोम इंडस्ट्री, जिसे लाइफस्टाइल और हेल्थ दोनों से जुड़ा अहम सेक्टर माना जाता है, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण दबाव में है। सप्लाई चेन प्रभावित होने से आने वाले समय में कंडोम की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों के अनुसार कंडोम निर्माण में इस्तेमाल होने वाले अमोनिया और सिलिकॉन ऑयल जैसे पेट्रो-केमिकल उत्पादों की आपूर्ति बाधित हुई है। अमोनिया की कीमतों में 40-50% तक बढ़ोतरी की संभावना है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और इसका सीधा असर बाजार कीमतों पर पड़ेगा। भारत की करीब 8000 करोड़ रुपये की इस इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
इस स्थिति का असर केवल बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंडोम की कीमत बढ़ने या उपलब्धता घटने से परिवार नियोजन और एड्स नियंत्रण जैसे कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं।
क्या है असली चिंता?
कंडोम एक जरूरी हेल्थ प्रोडक्ट है, जो अनचाहे गर्भ और यौन संक्रमणों से बचाव करता है। इसकी कीमत बढ़ने से खासकर युवाओं और निम्न आय वर्ग पर असर पड़ सकता है, जिससे असुरक्षित संबंधों और टीनएज प्रेग्नेंसी के मामले बढ़ सकते हैं। ईरान जैसे तेल उत्पादक क्षेत्र में तनाव बढ़ने से पेट्रो-केमिकल सप्लाई प्रभावित होती है। इससे अमोनिया और अन्य कच्चे माल महंगे हो जाते हैं, जिसका असर सीधे उत्पादन लागत पर पड़ता है।
आम लोगों की जेब पर असर
अगर कंडोम महंगे होते हैं, तो यह सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ाएगा। खासकर ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के लिए इसकी पहुंच कम हो सकती है। सरकार के परिवार नियोजन और एचआईवी/एड्स नियंत्रण कार्यक्रम कंडोम की उपलब्धता पर निर्भर करते हैं। कीमत बढ़ने या कमी होने से इन योजनाओं की गति धीमी पड़ सकती है।
इंडस्ट्री के लिए चुनौती
कंपनियों के सामने लागत बढ़ने और मांग बनाए रखने की दोहरी चुनौती होगी। उन्हें या तो कीमत बढ़ानी पड़ेगी या मुनाफा कम करना पड़ेगा, जिससे इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ेगा।



