नई दिल्ली। रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा का दायित्व रेलवे सुरक्षा बल/आरपीएफ) को सौंपा गया है। आरपीएफ को चोरी, बेईमानी से गबन,उकसावे, मिलीभगत और साजिश जैसे अपराधों में रेलवे संपत्ति, अनाधिकृत कब्जा (अधिनियम), 1966 के प्रावधानों के तहत मामले दर्ज करने का अधिकार प्राप्त है। अपराधी के खिलाफ मामला दर्ज किया जाता है और जांच की जाती है, जिसके बाद सक्षम न्यायालय अर्थात विशेष रेलवे मजिस्ट्रेट की अदालत में तथा कुछ राज्यों में जहां विशेष रेलवे न्यायालय स्थापित नहीं हैं, वहां जिला न्यायालयों में शिकायत दर्ज की जाती है। यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में दी।
अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में पूछे गए प्रश्नों के जवाब में दी जानकारी

अश्विनी वैष्णव ने सदन को बताया कि पिछले पांच वर्षों (2021-2025) के दौरान आरपी/यूपी अधिनियम, 1966 के प्रावधानों के तहत कुल 52494 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से 50432 आरोपियों के खिलाफ संबंधित न्यायालयों में शिकायतें दर्ज की गईं है। पिछले पांच वर्षों (2021–2025) के दौरान पत्थरबाजी की कुल 12,157 घटनाएँ दर्ज की गईं, जिनमें आरपीएफ/जीआरपी द्वारा 8,441 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। पिछले पांच वर्षों (2021–2025) के दौरान भारतीय रेल में शरारती तत्वों की गतिविधियों के कारण ट्रेन के पटरी से उतरने की केवल तीन घटनाएँ हुईं। पूर्वी तट रेलवे के वाल्टेयर मंडल, उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल और दक्षिण रेलवे के चेन्नई मंडल में ट्रेन के पटरी से उतरने की एक-एक घटना हुई। इसके अलावा रेलवे की पटरियों के साथ किसी भी प्रकार की आपराधिक छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं।
रेलवे की राज्य स्तरीय सुरक्षा समिति की नियमित बैठकें होती हैं
रेलवे की राज्य स्तरीय सुरक्षा समिति (एसएलएससीआर) की नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं। ये समितियाँ प्रत्येक राज्य में संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) या पुलिस आयुक्त की अध्यक्षता में गठित की गई हैं, जिनमें आरपीएफ, जीआरपी और खुफिया इकाइयों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इसके अतिरिक्त, तोड़फोड़ की घटनाओं पर विशेष रूप से ध्यान देते हुए अपराधों पर नियंत्रण, मामले दर्ज करने, उनकी जांच और ट्रेनों का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने के लिए तथा खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान हेतु, आरपीएफ द्वारा राज्य पुलिस/जीआरपी प्राधिकरणों के साथ सभी स्तरों पर घनिष्ठ समन्वय बनाए रखा जाता है।
केंद्रीय एवं राज्य खुफिया एजेंसियों के अलावा, आरपीएफ को तैनात किया गया है
केंद्रीय एवं राज्य खुफिया एजेंसियों के अलावा, आरपीएफ की खुफिया इकाइयाँ, अर्थात अपराध खुफिया शाखा (सीआईबी) और विशेष खुफिया शाखा (एसआईबी) को तैनात किया गया है ताकि खुफिया जानकारी एकत्र की जा सके और संबंधित प्राधिकरणों के साथ समन्वय कर किसी भी आपराधिक गतिविधि की पहचान और रोकथाम के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा सके।रेलवे, आरपीएफ, जीआरपी एवं सिविल पुलिस द्वारा चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स और संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित रूप से गश्त की जा रही है।रेलवे की पटरियों के पास पड़े ढीले और बिखरे हुए सामान हटाने के लिए नियमित अभियान चलाए जाते हैं, जिनका उपयोग शरारती तत्व पटरियों पर अवरोध पैदा करने के लिए कर सकते हैं।रेलवे की पटरियों के आसपास रहने वाले लोगों को पटरियों पर बाहरी वस्तुएँ रखने, रेल के पुर्जे हटाने, रील बनाने आदि के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया जा रहा है तथा उनसे सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने का अनुरोध किया जाता है।निगरानी के लिए ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है तथा सौर ऊर्जा से संचालित स्टैंड-अलोन सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जा रहे हैं।



