नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग के बीच केंद्र सरकार ने आम आदमी को बड़ी राहत दी है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में भारी कटौती का ऐलान किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद को जानकारी दी कि घरेलू खपत के लिए पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क ₹13 से घटाकर ₹3 कर दिया गया है, जबकि डीजल पर इसे ₹10 से घटाकर शून्य (0) कर दिया गया है।
दाम घटेंगे नहीं पर बढ़ेंगे भी नहीं
आमतौर पर एक्साइज ड्यूटी घटने से तेल की कीमतें कम होती हैं, लेकिन इस बार स्थिति असाधारण है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, ड्यूटी में यह कटौती इसलिए की गई है ताकि तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी लागत का बोझ आम जनता पर न डालें। साफ शब्दों में कहें तो इस फैसले से पेट्रोल-डीजल के दाम घटेंगे नहीं, लेकिन युद्ध के संकट के बावजूद इनमें बढ़ोतरी भी नहीं होगी।
देश में तेल की कमी न हो
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने निर्यात पर शुल्क (Export Duty) बढ़ा दिया है। डीजल निर्यात ₹21.5 प्रति लीटर का शुल्क लगाया गया। हवाई ईंधन निर्यात ₹29.5 प्रति लीटर का शुल्क लागू। निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन हमेशा नागरिकों को कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाने का रहा है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आंकड़ों के जरिए स्थिति की गंभीरता बताई। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें $70 प्रति बैरल से बढ़कर लगभग $122 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।
दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में तेल की कीमतें 30-50% तक बढ़ीं। उत्तरी अमेरिका में 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीका में 50% तक दाम बढ़ चुके हैं। भारत की स्थिति को देखे तो वैश्विक संकट के बावजूद सरकार ने एक्साइज ड्यूटी का बोझ खुद उठाकर भारतीय उपभोक्ताओं को कीमतों में लगी आग से बचा लिया है।



