लखनऊ। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में शुक्रवार को आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम देखने को मिला। चैत्र रामनवमी के पावन अवसर पर दोपहर ठीक 12 बजे, अभिजीत मुहूर्त में प्रभु रामलला का ‘सूर्य तिलक’ संपन्न हुआ। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरा अवसर था जब भगवान के ललाट पर सूर्य की नीली किरणें करीब 9 मिनट तक सुशोभित हुईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक पल को टेलीविजन पर लाइव देखा और हाथ जोड़कर नमन किया।
विज्ञान और श्रद्धा का संगम
रामलला के मस्तक पर सूर्य की किरणें पहुंचाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक विशेष प्रणाली तैयार की थी। सूर्य तिलक के लिए अष्टधातु के 20 पाइपों से बना 65 फीट लंबा एक जटिल स्ट्रक्चर तैयार किया गया। कुल 4 विशेष लेंस और 4 मिरर (दर्पण) के जरिए सूर्य की रोशनी को परावर्तित कर सीधे गर्भगृह तक पहुंचाया गया। ठीक 12 बजे जैसे ही किरणें भगवान के मस्तक पर पड़ीं, पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गूंज उठा।

18 घंटे खुले रहेंगे रामलला के कपाट
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने दर्शन की अवधि 3 घंटे बढ़ा दी है।
आज सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक (कुल 18 घंटे) भक्त दर्शन कर सकेंगे। पहले यह समय सुबह 6:30 से रात 9:30 बजे तक था। राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर जनसैलाब उमड़ पड़ा है। अनुमान के मुताबिक करीब 10 लाख लोग दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचे हैं।
56 भोग और विशेष श्रृंगार
सूर्य तिलक के साथ ही प्रतीकात्मक रूप से रामलला का जन्म हुआ। इस अवसर पर 14 पुजारियों ने गर्भगृह में विशेष पूजा और आरती की। सुबह 5:30 बजे भगवान को भव्य पीतांबर धारण कराया गया और तिलक के बाद उन्हें 56 तरह के व्यंजनों का महाभोग लगाया गया। अनुष्ठान के दौरान कुछ समय के लिए मंदिर के पट बंद रखे गए थे।



