नई दिल्ली। देश की जीवनरेखा मानी जाने वाली भारतीय रेलवे तेजी से विस्तार और आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रही है। संसद में रेल मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में रेलवे को ₹2.78 लाख करोड़ का रिकॉर्ड आवंटन मिला है, जो बुनियादी ढांचे के विकास, सुरक्षा प्रणाली के सुदृढ़ीकरण और यात्री सुविधाओं में सुधार को नई गति देगा।
उन्होंने कहा कि रेल बजट को आम बजट में शामिल करने के बाद रेलवे के विकास को नई दिशा मिली है। इससे परियोजनाओं की मंजूरी, तकनीक के उपयोग और नई सेवाओं की शुरुआत में तेजी आई है। पहले जहां रेलवे को ₹25-30 हजार करोड़ की बजटीय सहायता मिलती थी, वहीं अब यह कई गुना बढ़ चुकी है, जिससे दीर्घकालिक योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।
नेटवर्क विस्तार और माल ढुलाई में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
रेलवे का कुल नेटवर्क अब लगभग 1.37 लाख रूट किलोमीटर तक पहुंच गया है और प्रतिदिन 25,500 से अधिक ट्रेनें संचालित हो रही हैं। पिछले एक दशक में करीब 35,000 किलोमीटर नई रेल पटरियां बिछाई गईं, जबकि विद्युतीकरण 5,200 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 47,000 किलोमीटर तक पहुंच गया है।
माल ढुलाई के क्षेत्र में भी रेलवे ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2013-14 में जहां माल ढुलाई करीब 1,055 मिलियन टन थी, वह अब बढ़कर लगभग 1,650 मिलियन टन तक पहुंच गई है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के तहत करीब 2,800 किलोमीटर मार्ग पर काम पूरा हो चुका है और इन कॉरिडोर पर प्रतिदिन सैकड़ों मालगाड़ियां संचालित हो रही हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मजबूती मिली है।
सुरक्षा पर बड़ा निवेश, दुर्घटनाओं में भारी कमी
रेल मंत्री ने कहा कि सुरक्षा रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी दिशा में व्यापक निवेश किया गया है। रेलवे दुर्घटनाओं में करीब 90 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। ट्रैक रखरखाव, रोलिंग स्टॉक के उन्नयन और आधुनिक तकनीक के उपयोग से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ को 3,000 किलोमीटर नेटवर्क पर लागू किया जा चुका है, जबकि 20,000 किलोमीटर पर काम जारी है। इसके अलावा रोड ओवरब्रिज और अंडरब्रिज की संख्या 4,000 से बढ़कर लगभग 14,000 हो गई है, जिससे लेवल क्रॉसिंग से जुड़े जोखिम कम हुए हैं।
133 अमृत भारत ट्रेनों का मैन्युफैक्चरिंग चल रहा है। जो देश के हर गरीब परिवार के लिए बहुत बड़ा वरदान साबित होगा : माननीय रेल मंत्री @AshwiniVaishnaw जी pic.twitter.com/EwVaPlrYYf
— Ministry of Railways (@RailMinIndia) March 17, 2026
सस्ती यात्रा पर जोर, भारी सब्सिडी जारी
रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे आम और मध्यम वर्ग के यात्रियों के लिए किफायती यात्रा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार प्रत्येक यात्री टिकट की लागत का औसतन 45 प्रतिशत स्वयं वहन कर रही है। लगभग 70 प्रतिशत कोच जनरल और स्लीपर श्रेणी के हैं, जिससे अधिकतर यात्रियों को सस्ती यात्रा उपलब्ध हो रही है। पिछले दो वर्षों में अतिरिक्त जनरल कोच भी जोड़े गए हैं, ताकि त्योहारों और पीक सीजन में यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके।
नई ट्रेनों और आधुनिक सेवाओं का विस्तार
रेल मंत्री ने बताया कि वर्तमान में 160 से अधिक वंदे भारत ट्रेनें संचालित हैं, जबकि 60 अमृत भारत ट्रेनें सेवा में हैं और 133 निर्माणाधीन हैं। कम दूरी की यात्रा को सुगम बनाने के लिए 200 नई इंटरसिटी (मेमू) ट्रेनें शुरू की जाएंगी। मुंबई के उपनगरीय नेटवर्क को सुदृढ़ करने के लिए 238 नई स्वचालित दरवाजों वाली ट्रेनें भी तैयार की जा रही हैं। त्योहारों के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनों के संचालन का दायरा भी बढ़ाया गया है।
स्टेशन पुनर्विकास और तकनीकी बदलाव
देशभर में 1,300 स्टेशनों के पुनर्विकास का कार्यक्रम चल रहा है, जिनमें से 180 का कार्य पूरा हो चुका है और 500 से अधिक अंतिम चरण में हैं। रेलवे में एआई, आईओटी और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है, जिससे परिचालन दक्षता और यात्री अनुभव में सुधार हो रहा है। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के तहत रेलवन (RailOne) ऐप को व्यापक लोकप्रियता मिली है, जिसके माध्यम से टिकट बुकिंग, पूछताछ और शिकायत निवारण जैसी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।
रेलवे के आरंभ से 2014 तक कुल 125 किलोमीटर टनल बनी थी। 2014 के बाद 486 किलोमीटर टनल बनी है :माननीय रेल मंत्री @AshwiniVaishnaw जी pic.twitter.com/dRRwUNxPtq
— Ministry of Railways (@RailMinIndia) March 17, 2026
रोजगार और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया
रेल मंत्री ने बताया कि पिछले दस वर्षों में रेलवे में करीब पांच लाख नौकरियां दी गई हैं, जबकि 1.43 लाख भर्तियां प्रक्रिया में हैं। भर्ती परीक्षाएं 15 भाषाओं और 150 शहरों में आयोजित की जा रही हैं, जिससे पारदर्शिता और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो रही है।
हाई-स्पीड रेल और भविष्य की योजनाएं
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना पर तेजी से काम जारी है। 300 किलोमीटर से अधिक वायाडक्ट निर्माण पूरा हो चुका है और समुद्र के नीचे सुरंग निर्माण पर काम चल रहा है। इस परियोजना को 2027 से चरणबद्ध रूप से शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे दोनों शहरों के बीच यात्रा समय दो घंटे से भी कम हो सकता है। इसके अलावा सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की भी घोषणा की गई है, जिससे देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का विस्तार होगा।
सीमावर्ती और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में कनेक्टिविटी पर जोर
रेल मंत्री ने बताया कि पूर्वोत्तर और सीमावर्ती क्षेत्रों में कई नई रेल परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनसे सामरिक संपर्क, क्षेत्रीय विकास और लॉजिस्टिक्स को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि रेलवे का यह व्यापक कायाकल्प कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास, तकनीकी नवाचार और बड़े निवेश का परिणाम है। सरकार का उद्देश्य सुरक्षित, आधुनिक और सुलभ रेल सेवा उपलब्ध कराना है, ताकि आम नागरिकों को बेहतर यात्रा अनुभव मिल सके।



