नई दिल्ली। रेल मंत्रालय ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की इंस्पेक्टर चंदना सिन्हा को भारतीय रेलवे के सर्वोच्च सेवा सम्मान अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया है। वर्ष 2024 में उन्होंने 152 से अधिक बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया, जबकि 41 बच्चों को बाल श्रम और मानव तस्करी से भी मुक्त कराया।
नन्हे फरिश्ते मिशन के तहत बड़ी सफलता
यह रेस्क्यू अभियान रेलवे सुरक्षा बल के ‘नन्हे फरिश्ते मिशन’ के तहत चलाया गया। इस मिशन का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में संकट में फंसे, खोए हुए या शोषण के शिकार बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित बचाना है। इस पहल के तहत घर से भागे हुए, अनाथ या तस्करी के शिकार बच्चों को संरक्षण देकर उन्हें उनके परिवार या संबंधित बाल संरक्षण संस्थाओं तक पहुंचाया जाता है। यह अभियान 2018 में शुरू हुआ था, जिसके अंतर्गत अब तक हजारों बच्चों को रेस्क्यू किया जा चुका है।
सादे कपड़ों में यात्रियों के बीच रह निगरानी
छत्तीसगढ़ की रहने वाली इंस्पेक्टर चंदना सिन्हा ने बताया कि अगवा या खोए हुए बच्चों की पहचान करना बेहद चुनौतीपूर्ण काम होता है। कई बार पहली नजर में सब कुछ सामान्य लगता है, लेकिन गहन निगरानी के बाद सच्चाई सामने आती है। उन्होंने बताया कि कई बार RPF की टीमें सादे कपड़ों में यात्रियों के बीच घुल-मिल जाती हैं, ताकि संदिग्ध गतिविधियों की पहचान की जा सके और बच्चों को समय रहते बचाया जा सके।
अभी बहुत काम बाकी
इंस्पेक्टर सिन्हा के मुताबिक, बच्चों के अपहरण, तस्करी और शोषण के मामले बहुत अधिक हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां कुल मामलों के सिर्फ एक फीसदी तक ही पहुंच पाती हैं। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू के बाद बच्चों की काउंसलिंग भी की जाती है, ताकि वे दोबारा ऐसी स्थिति में न फंसें और सुरक्षित भविष्य की ओर लौट सकें।
रेल मंत्रालय ने की सराहना
रेल मंत्रालय और भारतीय रेलवे ने इंस्पेक्टर चंदना सिन्हा के इस सराहनीय कार्य को बच्चों की सुरक्षा के क्षेत्र में मिसाल बताया है। मंत्रालय का कहना है कि ‘नन्हे फरिश्ते मिशन’ बाल श्रम, अपराध और मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई में एक प्रभावी पहल बनकर उभरा है।



