वॉशिंगटन। नोबेल फाउंडेशन ने रविवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर वेनेजुएला की नेता मारिया कोरीना माचाडो द्वारा अपने नोबेल शांति पुरस्कार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को “भेंट” करने के कदम को खारिज कर दिया है। फाउंडेशन ने जोर देकर कहा कि नोबेल पुरस्कार की गरिमा और अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के नियमों के अनुसार, यह सम्मान किसी अन्य व्यक्ति को न तो बेचा जा सकता है और न ही हस्तांतरित किया जा सकता है।
क्या है पूरा विवाद?
वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्षरत माचाडो को साल 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था। हाल ही में वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप और निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद, माचाडो ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपना गोल्ड मेडल एक फ्रेम में जड़वाकर ट्रंप को भेंट कर दिया। मेडल के साथ एक संदेश में उन्होंने ट्रंप के “असाधारण नेतृत्व” के प्रति आभार व्यक्त किया था।
नोबेल फाउंडेशन की दलील
फाउंडेशन ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर जारी संदेश में कहा:
“नोबेल फाउंडेशन का मुख्य मिशन पुरस्कारों की गरिमा बनाए रखना है। पुरस्कार केवल उन्हें दिए जाते हैं जिन्होंने मानवता के लिए सबसे बड़ा लाभ प्रदान किया हो। यह पुरस्कार प्रतीकात्मक रूप से भी किसी और को नहीं दिया जा सकता।”
पुरस्कार के नियम: मेडल बदल सकता है, ‘खिताब’ नहीं
नोबेल संस्थान ने स्पष्ट किया कि:
- अविभाज्य सम्मान: नोबेल पुरस्कार का सम्मान और पहचान केवल उस व्यक्ति या संगठन से जुड़ी रहती है जिसे समिति ने चुना है।
- इतिहास में दर्ज नाम: भले ही भौतिक रूप से मेडल या डिप्लोमा किसी और के पास चला जाए, लेकिन इतिहास के आधिकारिक रिकॉर्ड में माचाडो ही विजेता बनी रहेंगी।
- अंतिम निर्णय: एक बार पुरस्कार की घोषणा होने के बाद इसे न तो रद्द किया जा सकता है और न ही साझा किया जा सकता है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा
ट्रंप ने इस उपहार को “अदभुत” बताया और सोशल मीडिया पर मेडल की तस्वीर साझा करते हुए माचाडो को धन्यवाद दिया। हालांकि, नॉर्वे के कई राजनेताओं ने माचाडो के इस कदम को “हास्यास्पद” बताया है। जानकारों का मानना है कि माचाडो ने यह कदम ट्रंप का समर्थन हासिल करने के लिए एक ‘राजनयिक दांव’ (Diplomatic Move) के रूप में चला है।



