नई दिल्ली/लंदन, 12 जनवरी।पिछले कुछ वर्षों में ओज़ेम्पिक जैसी जीएलपी-1 दवाएं वजन घटाने के लिए दुनियाभर में तेजी से लोकप्रिय हुई हैं। कई मशहूर हस्तियों से लेकर आम लोगों तक ने कम समय में चौंकाने वाला वजन घटाया। लेकिन अब यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या इन दवाओं को एक बार शुरू करने के बाद हमेशा लेना पड़ेगा, और अगर दवा बंद कर दी जाए तो शरीर पर क्या असर पड़ता है।
वजन घटाने के लिए इस्तेमाल की जा रही ओज़ेम्पिक (जीएलपी-1) दवाओं को लेकर यूके के प्रसिद्ध सर्जन डॉ. करण राजन ने अहम जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि जीएलपी-1 दवाएं स्थायी वजन घटाने का समाधान नहीं हैं और दवा बंद करने के बाद अधिकांश लोगों में वजन दोबारा बढ़ने लगता है।
डॉ. राजन के अनुसार, 9 हजार से अधिक लोगों पर किए गए विश्लेषण में पाया गया कि जिन्होंने जीएलपी-1 दवाएं लेना बंद किया, उनका वजन औसतन हर महीने करीब 0.8 किलोग्राम बढ़ गया। लगभग डेढ़ साल के भीतर कई लोग अपने पुराने वजन पर वापस पहुंच गए।
हालांकि, उन्होंने इसे दवाओं की असफलता मानने से इनकार किया। डॉ. राजन का कहना है कि मोटापा एक दीर्घकालिक और बार-बार लौटने वाली स्थिति है। जीएलपी-1 दवाएं भूख कम करने और पेट खाली होने की प्रक्रिया को धीमा करने का संकेत देती हैं, लेकिन जैसे ही यह संकेत हटता है, शरीर अपनी पुरानी जैविक स्थिति में लौट आता है।
उन्होंने समझाया कि जीएलपी-1 दवाएं किसी चमत्कारी इलाज की तरह नहीं हैं, बल्कि इन्हें रक्तचाप या कोलेस्ट्रॉल की दवाओं की तरह समझना चाहिए। दवा लेने पर असर रहता है और छोड़ते ही प्रभाव खत्म हो जाता है।
लंबे समय तक वजन नियंत्रित रखने के लिए डॉ. राजन ने जीवनशैली में बदलाव को बेहद जरूरी बताया। इसके तहत मांसपेशियों की देखभाल, संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर, अच्छी नींद, तनाव प्रबंधन और इंसुलिन संवेदनशीलता पर ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यह ठीक वैसा ही है जैसे त्वचा की एलर्जी। कुछ लोग केवल सावधानी बरतकर बिना दवा के ठीक रहते हैं, कुछ को कभी-कभार दवा की जरूरत होती है, जबकि कुछ को लंबे समय तक दवा लेनी पड़ती है। जीएलपी-1 दवाओं के साथ भी यही स्थिति लागू होती है।



