नई दिल्ली, 12 जनवरी। डिजिटल युग में जहां शासन, सुरक्षा और प्रशासन का बड़ा हिस्सा मोबाइल और इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है, वहीं भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े शीर्ष पद पर बैठे अजीत डोभाल अपनी अलग कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। समय-समय पर उनके नाम से सोशल मीडिया पर कई दावे और संदेश वायरल होते रहे हैं, जिनमें से कई को सरकार ने फर्जी बताया है। ऐसे में उनके संचार के तरीकों को लेकर जिज्ञासा बनी रहती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने स्पष्ट किया है कि वे अपने दैनिक कार्यों में न तो मोबाइल फोन का और न ही इंटरनेट का उपयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि फोन का प्रयोग वे केवल पारिवारिक मामलों या अन्य देशों के लोगों से आवश्यक बातचीत के लिए करते हैं।
भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित विकसित भारत युवा नेता संवाद–2026 के उद्घाटन सत्र के दौरान सवालों का जवाब देते हुए डोभाल ने कहा कि उनके कामकाज के लिए संचार के कई अन्य सुरक्षित माध्यम उपलब्ध हैं, जिनकी जानकारी आम लोगों को नहीं होती। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में पारंपरिक और गोपनीय तरीकों से संवाद अधिक प्रभावी और सुरक्षित होता है।
डोभाल ने इंटरनेट पर उनके नाम से चलने वाली खबरों और संदेशों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि कई बातें केवल कल्पना होती हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले सूचना एवं प्रसारण विभाग की तथ्य-जांच इकाई ने अजीत डोभाल के नाम से चल रहे एक फर्जी संदेश का खंडन किया था और स्पष्ट किया था कि उनका कोई आधिकारिक सोशल मीडिया खाता नहीं है।
अजीत डोभाल:
उत्तराखंड में जन्मे अजीत डोभाल 1968 बैच के पुलिस सेवा अधिकारी रहे हैं। आतंकवाद निरोध, आंतरिक सुरक्षा और खुफिया अभियानों में उनका लंबा अनुभव रहा है। वे 2014 से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर कार्यरत हैं और देश के कई अहम सुरक्षा निर्णयों में उनकी प्रमुख भूमिका रही है।



