नई दिल्ली: हार्ट अटैक कभी भी और किसी को भी आ सकता है। ऐसे में पहले कुछ मिनटों में लिया गया सही फैसला मरीज की जान बचा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट अटैक के दौरान समय की भूमिका सबसे अहम होती है। जितनी जल्दी इलाज शुरू होता है, उतना ही दिल की मांसपेशियों को नुकसान कम होता है।

फरीदाबाद स्थित मारेंगो एशिया हॉस्पिटल्स के प्रोग्राम क्लिनिकल डायरेक्टर (कार्डियोलॉजी) डॉ. गजिंदर कुमार गोयल के अनुसार, “हार्ट अटैक में टाइम इज़ मसल। इलाज में जितनी देर होती है, दिल को उतना ज़्यादा नुकसान पहुंचता है। इसलिए सबसे पहला कदम है मरीज को जल्द से जल्द हार्ट अटैक की सुविधा वाले अस्पताल तक पहुंचाना।”
हार्ट अटैक के चेतावनी संकेत पहचानना ज़रूरी
डॉ. गोयल बताते हैं कि मदद करने से पहले लक्षणों को पहचानना बेहद ज़रूरी है। हार्ट अटैक के आम लक्षणों में शामिल हैं—
- सीने में जकड़न या भारीपन
- सीने, जबड़े, कंधे, गर्दन, पीठ, हाथ या पेट में लगातार दर्द
- ठंडा पसीना आना
- सांस फूलना
- कमजोरी, घबराहट या चक्कर
- मतली या बेचैनी
यदि इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत इमरजेंसी हेल्पलाइन पर कॉल करें। विशेषज्ञों के अनुसार, हर मिनट कीमती होता है।
‘गोल्डन ऑवर’ क्यों है महत्वपूर्ण?
डॉ. गोयल के मुताबिक, हार्ट अटैक के बाद पहले 60 मिनट को “गोल्डन ऑवर” कहा जाता है। इस दौरान सही इलाज मिलने पर दिल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है और कुछ मामलों में नुकसान पूरी तरह उलट भी सकता है।
एम्बुलेंस आने तक क्या करें?
मेडिकल मदद आने तक निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं—
- मरीज को शांत रखें और बैठी हुई अवस्था में रखें
- उसकी सांस और नाड़ी पर नज़र बनाए रखें
- यदि मरीज के पास पहले से सीने के दर्द की दवा हो, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार मदद करें
- अगर एलर्जी न हो, तो एस्पिरिन की एक गोली चबाने को दें, इससे खून पतला होता है और नुकसान कम हो सकता है
- तंग कपड़े ढीले कर दें ताकि सांस लेने में आसानी हो
- यदि मरीज बेहोश हो जाए और सांस न ले रहा हो, तो हैंड्स-ओनली सीपीआर शुरू करें और मदद आने तक जारी रखें
अगर खुद को हार्ट अटैक का शक हो तो क्या करें?
डॉ. गोयल सलाह देते हैं कि—
- तुरंत आपातकालीन सेवाओं को कॉल करें
- खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल न जाएं
- जल्दी एस्पिरिन लेने से दिल को होने वाला नुकसान कम हो सकता है
विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट अटैक एक मेडिकल इमरजेंसी है। लक्षणों की सही पहचान, घबराए बिना त्वरित कार्रवाई और सही फर्स्ट-एड उपाय अपनाकर कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।



