नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष नीतिन नबीन दिल्ली के बीजेपी हेडक्वार्टर में जमकर स्वागत हुआ। दिल्ली के नेताओं समेत अन्य प्रदेश के भाजपा नेताओं ने उनका स्वागत फूल-माला पहनाकर स्वागत किया। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा, पीयूष गोयल समेत भाजपा के दिग्गज नेता मौजूद रहे। इन्हीं की मौजूदगी में बनी ने पदभार ग्रहण किया।
कौन हैं नीतिन नबीन
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से नबीन बीजेपी विधायक हैं। वह नई गठित बिहार सरकार में मंत्री के पद पर भी हैं। वे पार्टी के युवा और तेज-तर्रार नेताओं में गिने जाते हैं। नितिन नबीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा बिहार के विधायक रह चुके थे और जयप्रकाश नारायण आंदोलन से जुड़े थे। नबीन अपने सियासी करियर में कभी किसी विवाद से नहीं जुड़े हैं। यही वजह है कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने उन पर भरोसा जताया है। राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ ने भी इस फैसले का स्वागत किया है।
स्वागत में एयरपोर्ट पहुंचीं दिल्ली सीएम
भाजपा के इतिहास में यह पहला मौका देखने को मिला जब किसी अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने के बाद इतने लंबे समय तक नया अध्यक्ष नहीं चुना गया हो। नबीन के नाम ने कई लोगों को चौंकाया भी है। कार्यकारी अध्यक्ष चुने जाने के एक दिन बाद सोमवार दोपहर पटना से दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे। एयरपोर्ट पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कई अन्य नेताओं ने उनकी अगवानी की।
विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का दायित्व सौंपे जाने के अवसर पर आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी, माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री @JPNadda जी, माननीय गृहमंत्री श्री @AmitShah जी एवं माननीय रक्षामंत्री श्री @rajnathsingh जी… pic.twitter.com/DnD0MFBcTG
— Nitin Nabin (@NitinNabin) December 15, 2025
सियासी पंडित हैरान
पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नबीन का समृद्ध संगठनात्मक अनुभव आने वाले समय में पार्टी को मजबूत करेगा।संभावना है कि वे अंततः जेपी नड्डा के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे, जो सत्तारूढ़ पार्टी में एक पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है। कायस्थ जाति के नितिन नबीन को यह पद मिलना सभी को चौंकाया है। ओबीसी और दलित अध्यक्ष बनाने की संभावनाओं के बीच उनकी नियुक्ति से सियासी पंडित हैरान हैं।
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भाजपा का बड़ा दांव यूपी और बंगाल
बंगाल विधानसभा चुनाव में कायस्थ वोटों का असर देखने को मिल सकता है। पश्चिम बंगाल में कायस्थों की आबादी 27 लाख के करीब है। ज्यादातर हिस्सों में कायस्थ फैले हुए हैं। बोस, घोष, दत्ता, गुहा और अन्य उपनामों से इन्हें बंगाल में जाना जाता है। यहां एक प्रभावशाली समुदायों में से एक हैं। कोलकाता के आसपास भी बड़ी संख्या है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में भी संख्या बल अधिक है। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के अनुसार यूपी में कायस्थों की आबादी 1.5 से 2 करोड़ के बीच है। जो कुल जनसंख्या का 3 से 4 फीसदी तक है। प्रदेश के 37 जिलों की 67 विधानसभा सीटों पर दबदबा माना जाता है। श्रीवास्तव, सिन्हा, माथुर, सक्सेना, शरण,कर्ण, अंबष्ट उपनाम से ये पहचाने जाते हैं।



