नई दिल्ली। नवंबर में खुदरा महंगाई (रिटेल इंफ्लेशन) बढ़कर 0.71% पर पहुंच गई। अक्टूबर में यह 0.25% थी, जो पिछले 14 साल में सबसे कम स्तर था। सरकार ने शुक्रवार को महंगाई के ये नए आंकड़े जारी किए।
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी
नवंबर में खाद्य वस्तुओं की महीने-दर-महीने महंगाई -5.02% से बढ़कर -3.91% पर आ गई। यानी कीमतों में गिरावट की रफ्तार कम हुई है।सब्जियां, अंडा, मांस-मछली, मसाले, फ्यूल और बिजली (लाइट) की कीमतें बढ़ने से कुल महंगाई पर असर पड़ा है।
ग्रामीण और शहरी महंगाई दोनों बढ़ी
ग्रामीण महंगाई दर नवंबर में -0.25% से बढ़कर -0.10% पर पहुंच गई है। वहीं शहरी महंगाई 0.88% से बढ़कर 1.40% हो गई है। इससे पहले अक्टूबर में रिटेल महंगाई 0.25% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर थी। इसका मुख्य कारण खाने-पीने की कीमतों में गिरावट थी।
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कैसे मापते हैं महंगाई
सीपीआई सीरीज यानी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) के जरिए सरकार महंगाई मापती है। सरल भाषा में कहें तो सीपीआई यह बताता है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजें-जैसे दूध, सब्जियां, अनाज, पेट्रोल पहले की तुलना में कितनी महंगी या सस्ती हुई हैं। सरकार एक बेस ईयर तय करती है और फिर उसी के आधार पर इन चीजों की कीमतों की तुलना की जाती है। इसी तुलना से महंगाई का प्रतिशत निकलता है।



