नई दिल्ली: देश की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान गगनयान मिशन की तैयारी को लेकर इसरो ने एक महत्वपूर्ण कदम और तय कर लिया है। केंद्रीय मंत्री डॉ॰ जितेन्द्र सिंह ने लोकसभा में जानकारी दी कि हाल ही में आयोजित इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट (आईएमएटी) सफलतापूर्वक पूरा हो गया है, जिससे मिशन-रेडीनेस की दिशा में एक बड़ा मील-पत्थर हासिल हुआ है।
क्रू मॉड्यूल की पैराशूट प्रणाली को परखने में रखी सावधानी
मंत्री ने बताया कि इस परीक्षण में क्रू मॉड्यूल (जहाँ अंतरिक्ष यात्री होंगे) की पैराशूट प्रणाली को असामान्य और कठिन परिस्थिति में परखा गया; यानी मुख्य पैराशूट खुलने की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की गई, ताकि यह देखा जा सके कि प्रणाली भारी दबाव व असामान्य भार उठाने की स्थिति में कितनी मजबूत है। इस परीक्षण के सफलतापूर्वक पूरा होने से यह साबित हो गया है कि पैराशूट प्रणाली मानव यात्रा के लिए सुरक्षित और भरोसेमन्द है।
डॉ॰ सिंह ने कहा कि इसरो इस प्रणाली और सभी परीक्षण परिणामों को स्वतंत्र तथा कठोर प्रावधानों से गुज़ारती है- जैसे डिज़ाइन रिव्यू टीम (डीआरटी), स्वतंत्र मूल्यांकन समिति और मानव-उड़ान मान्यता एवं प्रमाणन के लिए राष्ट्रीय सलाहकार पैनल (एनएपी)। उन्होंने कहा कि ये संस्थागत समीक्षा सुनिश्चित करती है कि हर परीक्षण निष्पक्ष तरीके से जाँचा जाए।
कमियों का किया जा रहा पुनः परीक्षण
मंत्री जी ने यह भी भरोसा दिलाया कि अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। हर प्रणाली की कड़ी जांच-परख के साथ-साथ, जहाँ भी कमियां मिलीं उन्हें सुधारा गया है और सुधार के बाद प्रणाली का पुनः परीक्षण किया जा रहा है। अंतरिक्ष यात्रियों की तैयारी में आपात स्थिति, सर्वाइवल-किट, असामान्य अवतरण तथा मनोवैज्ञानिक सहायता जैसे सभी पहलुओं को शामिल किया गया है।
वैश्विक मानकों के अनुसार है रिस्क-असेसमेंट ऐंड मिटिगेशन फ़्रेमवर्क
मंत्री ने यह भी कहा कि इसरो और सरकार ने एक मजबूत रिस्क-असेसमेंट ऐंड मिटिगेशन फ़्रेमवर्क बनाया है, जिसे मानव-उड़ान के वैश्विक मानकों के अनुसार तैयार किया गया है। मानव उड़ान प्रमाणन बोर्ड और राष्ट्रीय सलाहकार पैनल लगातार इस मिशन की समीक्षा कर रहे हैं ताकि मिशन का जोखिम स्वीकार्य स्तर तक ही रहे।
डॉ॰ सिंह ने अंत में कहा कि आईएमएटी जैसा हर परीक्षण केवल तकनीकी प्रणाली की पुष्टि नहीं करता, बल्कि अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण, ज़मीनी बचाव तैयारी और सुरक्षित मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए आवश्यक पूरे ढाँचे को मजबूत बनाता है। इस सफलता के साथ गगनयान मिशन को सन् 2027 की पहली तिमाही में प्रक्षेपित करने का लक्ष्य अब और करीब हो गया है।



