नई दिल्ली: स्वच्छता, गरिमा और स्वास्थ्य विशेषाधिकार नहीं, बल्कि मूल अधिकार हैं। इस अधिकार की याद दिलाने, उसे जन-चेतना की प्राथमिकता बनाने के लिए हर साल 19 नवंबर को दुनिया विश्व शौचालय दिवस मनाती है। यह दिन याद दिलाता है कि आधुनिकता, विकास, डिजिटल इंडिया की दौड़ में भी दुनिया के करोड़ों लोग आज सुरक्षित शौचालय से वंचित हैं। सुरक्षित शौचालय के प्रति लोगों को जागरूक करने के मकसद से नई दिल्ली में केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों मंत्री मनोहर लाल और जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की मौजूदगी में सुलभ इंटरनेशनल और वर्ल्ड टॉयलेट ऑर्गनाइजेशन ने तीन दिवसीय विश्व शौचालय सम्मेलन शुरू किया। दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, भूटान समेत 25 देशों के प्रतिनिधि और हिंदुस्तान यूनिलीवर, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, विश्व बैंक जैसे संगठन इसमें शामिल हुए।
2014 से 2019 तक: पांच साल में खुले में शौच से मुक्ति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 के स्वच्छ भारत मिशन के आह्वान पर सिर्फ पांच साल में 2019 में भारत को खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित किया गया। घर-घर शौचालय बनने से महिलाओं-बच्चियों की सुरक्षा और गरिमा बढ़ी, स्कूल में लड़कियों की उपस्थिति सुधरी और समाज में उनकी भागीदारी बढ़ी।
शहरों में नई चुनौती, नया समाधान
शहरों में तेजी से बढ़ती आबादी और प्रवासी मजदूरों की वजह से सार्वजनिक शौचालयों की जरूरत बढ़ गई है। स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत अब ODF से ODF++ और सुरक्षित स्वच्छता की ओर कदम बढ़ाया जा रहा है। पिछले दो साल में ही 5.5 करोड़ शहरी लोगों को सुरक्षित और बेहतर शौचालय सुविधा मिली, यह फ्रांस या इटली की पूरी आबादी के बराबर है। इससे दस्त से होने वाली बच्चों की मौतें भी कम हुई हैं।
‘आकांक्षी शौचालय’ : आधुनिक, समावेशी और पर्यावरण-अनुकूल
अब नए शौचालय सिर्फ ईंट-गारे के नहीं होंगे। इन्हें ‘आकांक्षी शौचालय’ कहा जा रहा है जिसमें स्मार्ट फीचर्स, दिव्यांग-मैत्रीपूर्ण डिजाइन, बच्चों और महिलाओं के लिए अलग सुविधा और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाली तकनीक होगी। अभी तक 29,000 ऐसे आकांक्षी शौचालय सीटों को मंजूरी मिल चुकी है। इंदौर के नेहरू पार्क और लखनऊ के चौक स्टेडियम के पास ऐसे नए शौचालयों का उद्घाटन भी हुआ।
दो नए अभियान शुरू
विश्व शौचालय दिवस पर आवास मंत्रालय ने दो बड़े जन-जागरूकता अभियान शुरू किए है। ‘टॉयलेट पास है’- सार्वजनिक जगहों पर शौचालय की जानकारी देगा और ‘मैं साफ ही अच्छा हूं’- सालभर चलने वाला अभियान, जो शौचालय को साफ रखने और सही इस्तेमाल की आदत डालेगा। साथ ही बच्चों में शुरू से ही स्वच्छ आदत डालने के लिए 21 दिन का विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी जारी किया गया।
मंत्री मनोहर लाल बोले, घर साफ नहीं, शौचालय साफ हो तभी स्वच्छता पूरी
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि घर का बेडरूम साफ होने से स्वच्छता नहीं आंकी जाती, शौचालय की स्थिति से पता चलता है। उन्होंने अपशिष्ट से धन (Waste to Wealth) और जल-संरक्षण पर जोर दिया। जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 12 करोड़ शौचालय बनने से हर साल करीब 3 लाख बच्चों की जान बच रही है।
सम्मेलन में आगे क्या?
अगले दो दिन जलवायु-अनुकूल शौचालय, अपशिष्ट से ऊर्जा, नए वित्तीय मॉडल, सफाई कर्मियों की सुरक्षा और समावेशी डिजाइन पर चर्चा होगी। भारत एक बार फिर दुनिया को बता रहा है कि स्वच्छता सिर्फ सुविधा नहीं, गरिमा और पर्यावरण का मामला है।



