नई दिल्ली: बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर बड़े संकट (Bangladesh Crisis) के दौर में है। ढाका स्थित अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) को मानवता के खिलाफ कथित अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाए जाने के बाद देश में उथल-पुथल तेज हो गई है। इसी मामले में पूर्व गृहमंत्री असद्दुजमां खान कमाल को भी फांसी की सजा दी गई है। यह फैसला न केवल राजनीतिक अस्थिरता बढ़ा रहा है, बल्कि फरवरी में होने वाले आम चुनावों पर भी हिंसा का साया गहरा रहा है।
समर्थकों की चेतावनी और बढ़ती अशांति
हसीना की समर्थक अवामी लीग, जो कभी देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति थी, अगर चुनावों में प्रतिबंधित रहती है तो बड़े स्तर पर संघर्ष की चेतावनी दे रही है। पार्टी नेताओं का दावा है कि प्रतिबंध जारी रहा तो देश अराजकता में डूब जाएगा और हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। इस फैसले से पहले ही ढाका में राजनीतिक हिंसा बढ़ चुकी थी। कई स्थानों पर देसी बम विस्फोट, बसों को आग के हवाले करने और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। पुलिस ने अवामी लीग के कई कार्यकर्ताओं को वैंडलिज़्म के आरोप में गिरफ्तार किया है।
संयुक्त राष्ट्र ने दी प्रतिक्रिया
78 वर्षीय शेख हसीना की फांसी के फैसले पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने गंभीर चिंता जताई है। उनके प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि संयुक्त राष्ट्र किसी भी परिस्थिति में मृत्युदंड का समर्थन नहीं करता। दूसरी ओर, विरोध प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के परिवार तत्काल सजा के पक्ष में हैं। हसीना पर 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के दौरान हुए हिंसक दमन के लिए यह मुकदमा चलाया गया था। इनमें संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 1,400 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और स्थिरता पर भारी असर पड़ा।
हिंसा से अर्थव्यवस्था को बड़ा खतरा
हसीना के बेटे सजीब वाजेद (Sajib Wazed) ने साफ बयान दिया है कि यदि अवामी लीग से प्रतिबंध नहीं हटाया गया, तो उनके समर्थक चुनाव कराने नहीं देंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में देश में भीषण संघर्ष खड़ा हो सकता है, जो 17 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश को झकझोर देगा। यह टकराव देश के कपड़ा निर्यात, वैश्विक ब्रांडों के व्यापार और IMF के 4.7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज को भी खतरे में डाल सकता है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव
शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद से भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में कड़वाहट बढ़ी है। ढाका ने भारत से हसीना को वापस सौंपने की मांग की है, लेकिन भारत का कहना है कि वह केवल बांग्लादेश के आम लोगों के हित में निर्णय लेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक बांग्लादेश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नहीं होते, तब तक लोकतांत्रिक स्थिरता की उम्मीद करना मुश्किल है। आगामी चुनावों में अवामी लीग की प्रतिद्वंद्वी बीएनपी के सत्ता में आने की संभावना जताई जा रही है।
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आगे का रास्ता कठिन
दोनों देशों के बीच हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर कड़वाहट बढ़ती जा रही है। विश्लेषकों का कहना है कि भारत और बांग्लादेश को रिश्तों को सामान्य करने के लिए किसी न किसी समाधान पर पहुंचना ही होगा। जब तक शेख हसीना भारत में मौजूद हैं, यह मुद्दा दोनों देशों के लिए एक संवेदनशील चुनौती बना रहेगा।



