बिहार के चर्चित सृजन घोटाले में बैंक मैनेजर सहित 3 को सजा

सृजन घोटाले का मामला तब खुला जब भागलपुर के जिलाधिकारी आदेश तितरमारे के सिग्नेचर वाले एक चेक को बैंक ने यह कहकर वापस कर दिया कि पर्याप्त पैसे नहीं हैं जबकि चेक एक सरकारी खाते का था। यह बात जिलाधिकारी के लिए चौंकाने वाली थी क्योंकि उनकी जानकारी में सरकारी खाते में पर्याप्त पैसे थे।

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भागलपुर: बिहार के बहुचर्चित सृजन घोटाले में पहला फैसला सामने आया है। पटना में सीबीआई की विशेष अदालत ने बैंक प्रबंधक समेत तीन लोगों को 4 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपियों पर 14 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। मामले में दोषी सहायक पूर्व बैंक मैनेजर राकेश कुमार और लिपिक अजय कुमार पांडे तथा भागलपुर समाहरणालय के तत्कालीन प्रधान नाजीर अमरेंद्र कुमार यादव को दोषी करार दिया गया है। अदालत ने दोषी प्रधान नजीर को 4 वर्षों के सश्रम कारावास की सजा के साथ 14 लाख का जुर्माना लगाया है। वहीं दोषी सहायक प्रबंधक को अदालत ने 3 वर्षों के आश्रम कारावास की सजा के साथ 4 लाख 75,000 का जुर्माना लगाया है वहीं दोषी बैंक लिपिक अजय कुमार को 3 वर्षों के सश्रम सजा के साथ 6 लाख 25, 000 तक का जुर्माना लगाया है।

सृजन घोटाला 1000 करोड रुपए से अधिक का था

सृजन घोटाला 1000 करोड रुपए से अधिक का हुआ था। मामले में कई गिरफ्तारियां हुई फिर बेल पर गिरफ्तार आरोपियों को छोड़ भी दिया गया लेकिन सीबीआई कोर्ट का पहला बड़ा फैसला अब सामने आया है। बता दें कि विभिन्न सरकारी विभागों से लगभग 1000 रुपये का घोटाला हुआ था मामले में बिहार सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश 18 अगस्त 2017 को की थी। केंद्र ने सीबीआई जांच की अधिसूचना 21 अगस्त 2017 को जारी की थी। सृजन महिला विकास सहयोग समिति महिलाओं का स्वयं संस्था समूह के रूप में निबंधित हुई थी।

कोआपरेटिव सोसाइटी के रूप में मान्यता दी गई थी

1996 में सहकारिता विभाग में कोऑपरेटिव सोसाइटी के रूप में संस्था को मान्यता दी गई थी या संस्था महिलाओं को रोजगार देने का काम करती थी इसके तहत महिलाओं द्वारा बने उत्पाद को बाजार में बेचा जाता था संस्था महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के नाम पर लोन देने के बजाय सभी रुपयों का घोटाला करते रहे। गलत ढंग से पैसों का ट्रांसफर क़ई निजी खातों में भी होते रहे। इस मामले में मुख्य आरोपी घोटाले की किंगपिन मनोरमा देवी की पहले ही मौत हो चुकी है वहीं उनके बेटे आरोपी अमित का सुराग नहीं मिल पाया है। 1 साल पहले मनोरमा देवी की बहू रजनी प्रिया को गिरफ्तार किया गया था उसने अपने पति की मौत की बात बताई है लेकिन लोगों के गले से यह बात नहीं उतर रही है रजनी प्रिया को भी फिलहाल बेल पर छोड़ दिया गया है। 2000 से 2017 के बीच काम करने वाले कई जिला अधिकारियों में से 2 जिलाधिकारी भी आरोपी पाए गए थे।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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