नई दिल्ली: 44वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (IITF) में साझीदार राज्य के रूप में शामिल बिहार ने इस वर्ष अपना भव्य और सांस्कृतिक वैभव से सजा पवेलियन दिल्ली में प्रदर्शित किया। मेले के पहले दिन बिहार पवेलियन का शुभारंभ बिहार सरकार के स्थानिक आयुक्त कुंदन कुमार और उद्योग विभाग के सचिव बी. कार्तिकेय धनजी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उद्घाटन के दौरान बिहार सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
सीतामढ़ी के पुनौराधाम मंदिर के प्रारूप जैसा मुख्य द्वार
इस वर्ष बिहार पवेलियन का मुख्य द्वार विशेष आकर्षण का केंद्र है। इसे सीतामढ़ी में निर्माणाधीन पुनौराधाम सीता माता मंदिर का रूप देकर सजाया गया है। मुख्य द्वार के पास पावापुरी मंदिर की प्रतिकृति भी बनाई गई है, जो बिहार की आध्यात्मिक विरासत को दर्शाती है।
बिहार संग्रहालय की अनमोल कलाकृतियां बनीं आकर्षण
बिहार पवेलियन को मेले का थीम एक भारत श्रेष्ठ भारत के अनुरूप बिहार के कलाकारों द्वारा हाथों से निर्मित मिथिला पेंटिंग, मंजूषा पेंटिंग, टिकुली आर्ट आदि बिहार के नायाब पेंटिंग से सजाया गया है l बिहार पवेलियन के सेंटर हॉल में बिहार संग्रहालय द्वारा यक्षणी मूर्ति, बुद्ध की प्रतिमा एवं नामचीन लोक एवं समकालीन कलाकारों की उतकृष्ट कलाकृतियों की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र है l
बिहार की कला, हस्तशिल्प और खादी को मिला प्रमुख स्थान
बिहार पवेलियन में प्रदर्शनी सह बिक्री के हेंडलुम एवं हेंडीक्राफ्ट , जीविका दीदी, कंफेड (सुधा),तथा बिहार खादी एवं अन्य स्टाल लगाए गए हैं। इन स्टॉलों पर बिहार के पारंपरिक हस्तकलाओं एवं हस्तकरघा उत्पाद जिनमें नालंदा का बाबन बूटी, भागलपुर का सिल्क, मिथिलांचल का मधुबनी पेंटिंग, पटना की टीकुली कला इत्यादि को स्थान दिया गया है lइसके अलावा बिहार खादी के उत्पाद एवं जीविका दीदी का स्टॉल भी मुख्य आकर्षक है l
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मेले के स्टेट फूड कोर्ट में बिहार के जीविका दीदी द्वारा संचालित दीदी की रसोई में बिहार के विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन लोगों को लुभा रहा है l बिहार पवेलियन को प्रत्येक वर्ष मेले के थीम के अनुरूप नयाब डिजाइन एवं रूपरेखा से सजाया जाता है। इस वर्ष बिहार मंडप के मुख्य द्वार को सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में निर्माण हो रहा सीतामाता का मंदिर का प्रारूप बनाया गया है एवं मुख्य द्वार के बगल में पावापुरी मंदिर के प्रारूप का निर्माण किया गया है l



