नहीं बचेगी गाजीपुर लैंडफिल, बनेगा प्लांट

दिल्ली नगर निगम ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण को दी गई रिपोर्ट में बताया कि यहां रोजाना 2400 से 2600 मीट्रिक टन कचरा आता है, लेकिन वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में सिर्फ 700 से 1000 टन ही संसाधित हो पाता है

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नई दिल्ली: राजधानी के गाजीपुर लैंडफिल पर 65 मीटर ऊंचा कचरे का पहाड़ अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। दिल्ली नगर निगम ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को दी गई रिपोर्ट में बताया कि यहां रोजाना 2400 से 2600 मीट्रिक टन कचरा आता है, लेकिन वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में सिर्फ 700 से 1000 टन ही संसाधित हो पाता है। बाकी कचरा सीमित जगह पर डाला जाता है, क्योंकि ऊंचाई बढ़ाने की इजाजत नहीं है।

अच्छी खबर यह है कि पुराने कचरे की सफाई तेज रफ्तार पकड़ चुकी है और यह काम 2027 तक पूरा हो जाएगा। साइट पर पहले 85 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा जमा था। 2019 से शुरू बायो-माइनिंग प्रोजेक्ट में शुरुआत में मशीनों की जगह और ठेकेदारों की कमी जैसी दिक्कतें आईं। पहले ठेके में सिर्फ 13.9 लाख टन साफ हो सका, जिसे रद्द कर नया काम शुरू किया गया। अब अलवाजो सॉल्यूशंस कंपनी मार्च 2025 से 30 लाख टन (बढ़ाकर 45 लाख तक) कचरा साफ कर रही है। अगस्त 2025 तक 6.6 लाख टन साफ हो चुका है और कुल 32 लाख टन पुराना कचरा प्रोसेस हो गया। सितंबर 2025 में नया टेंडर जारी किया गया है, ताकि बाकी काम तीन महीने पहले पूरा हो। ये सारे प्रयास स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत केंद्र-राज्य फंड से हो रहे हैं। अप्रैल 2025 में बंद ओखला प्लांट को अगस्त से फिर चालू किया गया, जहां रोजाना करीब 300 टन कचरा भेजा जा रहा है।

अप्रैल से जुलाई 2025 तक सफाई में जबरदस्त प्रगति

अप्रैल से जुलाई 2025 तक सफाई में जबरदस्त प्रगति हुई। इस दौरान नया कचरा आने की तुलना में लगभग दोगुना पुराना कचरा हटाया गया। महीने-दर-महीने देखें तो अप्रैल में 58,201 टन नया कचरा आया, लेकिन 94,734 टन पुराना साफ हुआ। मई में 54,616 टन नया आया और 1,23,870 टन साफ। जून में 49,254 टन नया और 1,74,437 टन पुराना हटाया गया। जुलाई में 50,207 टन नया आया, जबकि 1,83,689 टन साफ हो गया। बायो-माइनिंग का वर्तमान ठेका मार्च 2026 तक है। इसमें पहले क्वार्टर (8 मार्च से 7 जून 2025) का लक्ष्य 6 फीसदी यानी 1.8 लाख टन था, जो 9.10 फीसदी यानी 2.73 लाख टन हासिल हो गया। दूसरे क्वार्टर (8 जून से 7 सितंबर 2025) का लक्ष्य 18 फीसदी यानी 5.4 लाख टन था, जो 13.60 फीसदी यानी 4.07 लाख टन पूरा हुआ। बाकी क्वार्टर्स (तीसरा: 8 सितंबर से 7 दिसंबर 2025, चौथा: 8 दिसंबर 2025 से 7 मार्च 2026, पांचवां: 8 अप्रैल से 7 जुलाई 2026, छठा: 8 अगस्त से 7 नवंबर 2026) में भी 18-20 फीसदी यानी 5.4 से 6 लाख टन प्रति क्वार्टर का लक्ष्य है।

कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए

एमसीडी ने कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। जुलाई 2025 में 2000 टन क्षमता वाले नए डब्ल्यूटीई प्लांट का टेंडर जारी हो चुका है। बायो-माइनिंग से निकला कचरा अलग-अलग जगह भेजा जा रहा है। निष्क्रिय कचरा और निर्माण-अवशेष (सीएंडडी) को दसना, लोनी, गाजियाबाद, नोएडा जैसे इलाकों में भराई के लिए, जबकि रिफ्यूज डेराइव्ड फ्यूल (आरडीएफ) को मेरठ-मुजफ्फरनगर की फैक्टरियों में ईंधन के रूप में भेजा जा रहा है। साइट पर 5 एकड़ जमीन साफ हो चुकी है, जहां अब ट्रॉमेल मशीनों के लिए शेड, आरडीएफ-इनर्ट स्टोरेज और वाहनों की पार्किंग बनाई गई है। लीचेट यानी कचरे से निकलने वाले गंदे पानी का प्रबंधन भी बेहतर हो गया है। अब इसे साइट पर ही छिड़काव के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिससे धूल कम होती है और बायो-कल्चर प्रक्रिया तेज चलती है। दिसंबर 2024 में दो बड़े लीचेट टैंक (प्रत्येक 50,000 लीटर क्षमता वाले) बनाए गए। जनवरी से जुलाई 2025 तक ज्यादातर लीचेट साइट पर ही इस्तेमाल हुआ। मसलन, जनवरी में 41 टैंकर साइट पर, मार्च में 34 साइट पर और 3 बाहर, जून में 43 साइट पर और 5 बाहर, जुलाई में 37 साइट पर और 5 बाहर भेजे गए।

जगह और प्रोसेसिंग प्लांट की कमी से थोड़ी अस्थायी डंपिंग हो रही

एनजीटी ने अप्रैल 2025 में गाजीपुर पर लगी भीषण आग के मामले में नोटिस जारी किया था। एमसीडी ने रिपोर्ट में कहा कि सीएंडडी कचरा ढेर पर डालना आग और गैस के खतरे को कम करने के लिए जरूरी है। ट्रॉमेल मशीनें 24 घंटे चलती रहती हैं (रखरखाव को छोड़कर) और क्षतिग्रस्त ड्रेन की मरम्मत का प्रस्ताव भेज दिया गया है। जगह और प्रोसेसिंग प्लांट की कमी से थोड़ी अस्थायी डंपिंग हो रही है, लेकिन नए प्लांट और प्रोजेक्ट्स से जल्द सब ठीक हो जाएगा।

Kuldeep Dwivedi

kuldeepd999@gmail.com

NewG India का अनुभवी चेहरा, 2017 में RGPV से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की। सिविल सर्विसेज कोच और लेखक के तौर पर शिक्षाकुल, एग्जामपुर, कॉसमॉस पब्लिकेशन जैसे अनेक संस्थानों में काम करने का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में NewG India में एंकर एवं रिसर्च स्कॉलर के तौर पर कार्य कर रहे हैं।

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