नई दिल्ली: वस्त्र मंत्रालय के हैंडलूम एवं हस्तशिल्प विकास आयुक्त कार्यालयों द्वारा आयोजित राष्ट्रीय हैंडलूम एवं हस्तशिल्प सम्मेलन 2025 एक नवंबर को ओडिशा राजधानी भुवनेश्वर में संपन्न हुआ। दो दिवसीय इस आयोजन ने हस्तनिर्मित क्षेत्र को पुनर्जीवित करने और विकसित भारत 2047 का महत्वपूर्ण स्तंभ बनाने की सरकारी प्रतिबद्धता को मजबूत किया। राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी, नीति विशेषज्ञों ने हस्तलूम-हस्तशिल्प उद्योगों के लिए एकीकृत विकास रोडमैप तैयार किया। चर्चा का केंद्र वर्तमान परिदृश्य मूल्यांकन और राज्य-केंद्र सहयोगी नई राष्ट्रीय योजना का ढांचा रहा।
परंपरा-प्रौद्योगिकी संतुलन पर बल
दूसरे दिन वस्त्र सचिव नीलम शमी राव ने सत्र की अध्यक्षता की। ओडिशा की अतिरिक्त मुख्य सचिव अनु गर्ग व हैंडलूम-हस्तशिल्प आयुक्त पूनम गुहा तापस कुमार उपस्थित रहे। राव ने पारंपरिक शिल्प को आधुनिक उपकरणों से जोड़कर उत्पादकता बढ़ाने और श्रम बोझ कम करने पर जोर दिया। एनआईएफटी व आईआईएचटी से बाजार पूर्वानुमान में सक्रियता की अपेक्षा की। कच्चे माल की अंतरराज्यीय निर्बाध आपूर्ति के लिए समन्वय पर बल देते हुए कहा कि हस्तलूम-हस्तशिल्प अर्थव्यवस्था का परिधि नहीं, भविष्य का प्रीमियम उत्पाद है।
छह मासिक संवाद की घोषणा
राव ने केंद्र-राज्य संवाद के लिए हर छह माह सम्मेलन आयोजित करने की योजना बताई। इससे सर्वोत्तम प्रथाएं साझा होंगी, प्रगति समीक्षा होगी। लचीला, समावेशी, नवाचारी हस्तनिर्मित क्षेत्र बनाने के लिए निरंतर समन्वय आवश्यक बताया, जो विकसित भारत 2047 से जुड़े।
ओडिशा की सतत विरासत
अनु गर्ग ने कोटपाड़ व डोंगरिया शॉल जैसे इको-उदाहरणों से हस्तलूम की सांस्कृतिक-पर्यावरणीय उपयोगिता रेखांकित की। कारीगर नाम-टैगिंग, युवा प्रशिक्षण, स्थिरता सेल व कठा सिल्क प्रचार की योजनाएं साझा कीं।
नई मिशन का खाका
हैंडलूम आयुक्त डॉ. एम. बीना ने राष्ट्रीय पारंपरिक वस्त्र मिशन (2026-31) प्रस्तुत किया। सहकारी संघवाद, कौशल उन्नयन, महिला-केंद्रित विकास, क्लस्टर सुविधाएं, वित्तीय सहायता व जीआई ब्रांडिंग हब पर फोकस। हस्तशिल्प आयुक्त अमृत राज ने तीन-स्तरीय (राष्ट्रीय-राज्य-जिला) मॉडल, डिजिटल शासन व प्रभाव निगरानी का प्रस्ताव दिया।
उद्घाटन व प्रदर्शनी
31 अक्टूबर को ओडिशा मुख्य सचिव श्री मनोज आहूजा ने उद्घाटन किया। डॉ. बीना, राज व गुहा उपस्थित रहीं। ताज विवांता में ओडिशा विरासत थीम पैवेलियन उद्घाटित। पहले दिन छह सत्रों में राज्य नवाचार चर्चित। प्रतिनिधि कला भूमि, बोयानिका, उत्कलिका शोरूम दर्शन पर गए।
समावेशी पारिस्थितिकी का संकल्प
विचार-विमर्श ने परंपरा-प्रौद्योगिकी संतुलन वाली एकीकृत व्यवस्था का संकल्प लिया। कारीगर-बुनकरों के लिए नवाचारी इकोसिस्टम बनेगा, जो धरोहर संरक्षित कर आजीविका मजबूत करेगा।



