जात-भात और बाहुबली के दलदल में फंसा मोकामा

बिहार चुनाव के बीच मोकामा उबल रहा है। दो बाहुबलियों की लड़ाई ने मोकामा को लाल कर दिया है।आज हम बात करेंगे कि कैसे जात-भात और बाहुबलियों के दलदल में मोकामा फंसा हुआ है।

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नई दिल्ली: बिहार चुनाव के बीच मोकामा उबल रहा है। दो बाहुबलियों की लड़ाई ने मोकामा को लाल कर दिया है। दुलारचंद हत्याकांड से इतर आज हम बात करेंगे कि कैसे जात-भात और बाहुबलियों के दलदल में मोकामा फंसा हुआ है।

भूमिहारों का दबदबा

मोकामा में भूमिहारों का दबदबा सबसे ज्यादा है। करीब 30 फीसदी भूमिहार आबादी वाले इस इलाके में सत्ता की बागडोर हमेशा इसी समाज के हाथों में रही।1952 से लेकर आज तक विधायक की कुर्सी पर भूमिहार ही बैठे हैं। चाहे वो मोकामा के पहले विधायक जगदीश नारायण सिंह हों या अनंत सिंह। जगदीश नारायण सिंह के बाद यहां सरयू नारायण प्रसाद सिंह, कामेश्वर प्रसाद सिंह, कृष्णा शाही से लेकर दिलीप सिंह, सूरजभान सिंह तक सब भूमिहार विधायक बने।

जातीय समीकरण

मोकामा में हर वोट जात और बिरादरी के समीकरणों से जुड़ा है। यहां भूमिहारों की आबादी 30 फीसदी से अधिक है, जबकि यादव करीब 20 फीसदी हैं। इसके अलावा राजपूत लगभग 10 फीसदी और कुर्मी कोइरी जैसी अतिपिछड़ी जातियां 20 से 25 फीसदी तक हैं। दलितों की हिस्सेदारी 16 से 17 फीसदी, जबकि मुस्लिम वोटर लगभग 5 फीसदी हैं। हमेशा से यादव, भूमिहार, कुशवाहा और मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

जात-भात वोट तय करता

नब्बे के दशक में लालू प्रसाद यादव के उभार के साथ ही यादवों का दबदबा बिहार की राजनीति में बढ़ा। इसी दौरान दुलारचंद यादव का उदय हुआ, जिन्होंने पहलवानी से लेकर सियासत तक का सफर तय किया। उन्होंने अनंत सिंह और उनके भाई दिलीप सिंह के खिलाफ कई बार चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं पाए। मोकामा में कहा जाता है, यहां जात के साथ भात भी वोट दिलाता है।

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बाहुबली फैक्टर

जातीय समीकरणों के बाद मोकामा की सियासत में बाहुबल हमेशा एक बड़ा फैक्टर रहा है। नब्बे के दशक में सूरजभान सिंह का नाम अंडरवर्ल्ड और बिहार की राजनीति दोनों में गूंजता था। साल 2000 में उन्होंने मोकामा से जीत हासिल की और अनंत सिंह के बड़े भाई व तत्कालीन मंत्री दिलीप सिंह को हराया था। अब सूरजभान अपनी पत्नी वीणा देवी को आरजेडी के टिकट पर मैदान में उतार चुके हैं, जिनके सामने जेडीयू से बाहुबली अनंत सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों भूमिहार समुदाय से हैं।

बाहुबलियों का वर्चस्व

2020 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह आरजेडी टिकट से मैदान में उतरे थे,जबकि जेडीयू की ओर से राजीव लोचन नारायण सिंह उम्मीदवार बने, जिन्हें मोकामा के सोनू-मोनू गैंग का समर्थन हासिल था। इसके बाद 2022 के उपचुनाव में बीजेपी ने नलिनी रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की पत्नी सोनम देवी को टिकट दिया। ललन सिंह को सूरजभान सिंह का करीबी माना जाता है। इस तरह से देखिए तो मोकामा में बाहुबलियों का ही वर्चस्व रहा है।

Pooja Thakur

pt37557@gmail.com

मीडिया की दुनिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय। वर्तमान में Newg India में बतौर कंटेंट राइटर और मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर काम कर रही हूं, जहां हर कहानी को एक नए नजरिए से पेश करने की कोशिश करती हूं।

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