नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित 12वें आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-प्लस) के साइडलाइन पर अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ से सकारात्मक बैठक की। प्रतिनिधिमंडल स्तर की चर्चाओं के बाद द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग की निरंतर प्रगति की सराहना की।
द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा
बैठक में दोनों पक्षों ने रक्षा क्षेत्र की चल रही गतिविधियों और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने सैन्य अभ्यास, सूचना साझा करने, क्षेत्रीय साझेदारों के साथ समन्वय और रक्षा उद्योग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। राजनाथ ने कहा कि यह साझेदारी सभी क्षेत्रों में लाभकारी सिद्ध हो रही है और इसका विस्तार करने का संकल्प दृढ़ है।
अमेरिका का भारत के प्रति प्रतिबद्धता
हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि भारत अमेरिका के लिए रक्षा सहयोग में प्राथमिकता वाला देश है। उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ निकट सहयोग कर स्वतंत्र एवं खुला इंडो-पैसिफिक सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह बयान क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी बढ़ रही है।
दस वर्षीय रक्षा ढांचा समझौता
बैठक के अंत में दोनों नेताओं ने ‘अमेरिका-भारत प्रमुख रक्षा साझेदारी के लिए ढांचा’ पर हस्ताक्षर किए। यह 2025 का दस्तावेज अगले दस वर्षों में साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का लक्ष्य रखता है। राजनाथ ने एक्स पोस्ट में कहा कि यह ढांचा भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों के पूरे स्पेक्ट्रम को नीतिगत दिशा प्रदान करेगा। यह हमारी बढ़ती रणनीतिक निकटता का संकेत है और नई दशक की साझेदारी की शुरुआत करेगा। रक्षा हमारी द्विपक्षीय संबंधों का प्रमुख स्तंभ बना रहेगा।
क्षेत्रीय स्थिरता के लिए मजबूत नींव
हेगसेथ ने भी एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यह ढांचा द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी को मजबूत कर क्षेत्रीय स्थिरता और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगा। उन्होंने समन्वय, सूचना आदान-प्रदान और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने लिखा कि हमारे रक्षा संबंध अब तक के सबसे मजबूत हैं।
साझेदारी के विस्तार के क्षेत्र
भारत और अमेरिका सैन्य स्तर पर अभ्यासों, सूचना साझाकरण और वैश्विक साझेदारों के साथ सहयोग से संबंधों को गहरा बना रहे हैं। रक्षा उद्योग, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और समन्वय तंत्रों पर फोकस से सहयोग नई दिशा ले रहा है। यह समझौता इंडो-पैसिफिक में नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस बैठक से भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों में नई गति मिलने की उम्मीद है, जो वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को प्रभावित करेगी।



