नई दिल्ली: शहरों में जमीन के पुराने और उलझे हुए रिकॉर्ड अब जल्द ही इतिहास बन जाएंगे। केंद्र सरकार का नया कार्यक्रम NAKSHA (राष्ट्रीय भू-स्थानिक ज्ञान आधारित शहरी भूमि सर्वे) शहरी इलाकों की हर जमीन का डिजिटल और सटीक नक्शा तैयार करेगा। इसे लागू करने के लिए 27-28 अक्टूबर को मसूरी के लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में देश भर के जिलाधिकारी और कलेक्टरों की दो दिन की खास कार्यशाला शुरू हो रही है। यह पहला मौका है जब इतने बड़े स्तर पर कलेक्टरों को NAKSHA की तकनीकी, कानूनी और प्रशासनिक ट्रेनिंग दी जाएगी। कार्यक्रम का मकसद है कि हर जिले में यह सर्वे बिना गड़बड़ी के चले और आम आदमी को जमीन का सही हिसाब आसानी से मिले।
क्या है NAKSHA?
NAKSHA यानी शहरी बस्तियों का डिजिटल सर्वे। इसमें ड्रोन, जीआईएस और आधुनिक तकनीक से हर प्लॉट, मकान और सड़क की सटीक माप ली जाएगी। पुराने कागजों की जगह अब सब कुछ ऑनलाइन होगा। इससे विवाद कम होंगे, प्रॉपर्टी टैक्स सही लगेगा और शहरों की प्लानिंग आसान हो जाएगी।
कार्यशाला में क्या होगा?
पहला दिन (27 अक्टूबर):
- उद्घाटन: डॉ. बागदी गौतम (BNYCRS निदेशक)
- मुख्य भाषण: मनोज जोशी (भूमि संसाधन विभाग सचिव)
- NAKSHA का पूरा प्लान बताएंगे श्री कुणाल सत्यार्थी (संयुक्त सचिव)
- तकनीकी सत्र: एस.के. सिन्हा (अतिरिक्त महासर्वेक्षक) डेटा कैसे इकट्ठा होगा, यह समझाएंगे।
- नक्ष वेब पोर्टल का लाइव डेमो एमपीएसईडीसी की टीम दिखाएगी।
दूसरा दिन (28 अक्टूबर):
- 6 राज्यों का अनुभव: गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, असम और मध्य प्रदेश के अधिकारी बताएंगे कि उन्होंने कैसे सर्वे शुरू किया और क्या दिक्कतें आईं।
- कानूनी और प्रशासनिक सत्र: एन.के. सुधांशु (यशदा डीजी) और एस. चोकलिंगम (महाराष्ट्र सीईओ) कानूनी अड़चनों का हल बताएंगे।
- ग्राउंड ट्रुथिंग डेमो: सर्वेक्षण विभाग की टीम मौके पर जाकर सटीक माप कैसे लेते हैं, इसका लाइव प्रदर्शन।
- कलेक्टरों को मिलेगी खास ट्रेनिंग
इस कार्यशाला में कलेक्टरों को सिखाया जाएगा:
- ड्रोन और जीआईएस से सर्वे कैसे करें
- डेटा को सुरक्षित कैसे रखें
- कानूनी विवादों से कैसे बचें
- जनता की शिकायतों का तुरंत निपटारा कैसे करें
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सरकार का लक्ष्य है कि 2026 तक सभी शहरी इलाकों में NAKSHA लागू हो जाए। इससे न सिर्फ जमीन के झगड़े खत्म होंगे, बल्कि शहरों का विकास भी तेज और पारदर्शी होगा।



