पटना: बिहार विधानसभा चुनाव अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। दो चरणों में होने वाले इस चुनाव के पहले चरण की तस्वीर पूरी तरह से साफ हो गई है। पहले चरण में कुल 121 विधानसभा सीटों पर 1314 उम्मीदवार मैदान में हैं। बारह महत्वपूर्ण सीटों पर इंडिया गठबंधन के घटक दलों आरजेडी, कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। वहीं, माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी के बेटे भागीरथ मांझी टिकट नहीं मिलने से नाराज हैं। जिसका परिणाम महागठबंधन के प्रतिकूल हो सकता है। इस बीच दूसरे चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब उम्मीदवारों के पास 23 अक्टूबर तक नाम वापस लेने का समय है।
पहले चरण में मुकाबला कड़ा
पहले चरण में मुकाबले बेहद दिलचस्प हैं। कई सीटों पर पुराने प्रतिद्वंद्वी फिर आमने-सामने हैं, जबकि कुछ जगहों पर नए चेहरे भी जोर लगा रहे हैं। इस चरण में 61 उम्मीदवारों ने नाम वापस लिए, जबकि 300 सेअधिक नामांकन खारिज किए गए। अब कुल 1314 उम्मीदवार मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 121 सीटों पर 1314 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें प्रमुख दलों बीजेपी, जेडीयू, आरजेडी, कांग्रेस, और वामपंथी पार्टियों के साथ-साथ निर्दलीय और छोटे दलों के उम्मीदवार भी शामिल हैं। पहले चरण की प्रमुख सीटों में रोसड़ा, राजापाकड़, बरबीघा, नालंदा, कुटुंबा, और बाराचट्टी शामिल हैं, जहां मुकाबला बेहद कड़ा माना जा रहा है।
महागठबंधन बारह सीटों पर आमने-सामने
इस बीच, महागठबंधन की आंतरिक कलह ने विपक्षी रणनीति को कमजोर कर दिया है। बारह महत्वपूर्ण सीटों पर आरजेडी, कांग्रेस, सीपीआई(एमएल), और सीपीआई के बीच सीट बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पाई है, जिसके चलते कई सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ की स्थिति बन गई है। आरजेडी ने 143 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, जबकि कांग्रेस और वाम दल क्रमशः 61 और 33 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया है। वीआईपी नेता मुकेश सहनी 20 सीटों की मांग कर हरे थे लेकिन गठबंधन में समन्वय की कमी ने स्थिति को जटिल बना दिया है।
भागीरथ मांझी ने दिल्ली में डाल दिया था डेरा
सूत्रों के अनुसार, टिकट की आस में भागीरथ मांझी बीते कुछ दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए थे। उनका कहना था कि राहुल गांधी ने खुद उन्हें टिकट देने का वादा किया था। वह बाराचट्टी से चुनाव लड़ने को तैयार थे, लेकिन अब टिकट नहीं मिलने से मायूस हैं।
बाराचट्टी सीट पर रोमांचक मुकाबला
बाराचट्टी सीट महागठबंधन के अंदरूनी समीकरणों का नया अखाड़ा बन गई थी। पिछली बार यहां से राजद ने चुनाव लड़ा था। फिलहाल यह सीट जीतनराम मांझी की समधन के कब्जे में है। इस बार राजद ने मांझी समुदाय से आने वाली तनुश्री मांझी को उम्मीदवार बनाया है। गौरतलब है कि गया जिले में मांझी समुदाय की आबादी अच्छी खासी है। दशरथ मांझी के परिवार का उस समुदाय में गहरा असर है। इसी वजह से इस सीट का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है।
एनडीए मजबूती से मैदान में
उधर, एनडीए ने अपनी रणनीति को मजबूती से लागू किया है। बीजेपी और जेडीयू को 101-101 सीटें, एलजेपी (रामविलास) को 29, और हम (सेक्युलर) को छह सीटें दी गई हैं। एनडीए की यह एकजुटता महागठबंधन के लिए चुनौती बन रही है। तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि गठबंधन अगले कुछ दिनों में एकजुट होकर मैदान में उतरेगा, लेकिन सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में ही अंतिम फैसला होगा। बिहार की सियासत में यह उथल-पुथल न केवल मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा कर रही है, बल्कि महागठबंधन की विश्वसनीयता को भी कमजोर कर रही है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विपक्षी गठबंधन अपनी एकता को बचा पाएगा, या एनडीए इस अवसर का फायदा उठाकर सत्ता में वापसी करेगा। इस बीच दूसरा चरण, जिसमें शेष सीटों पर मतदान होगा, के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और उम्मीदवार 23 अक्टूबर तक अपने नाम वापस ले सकते हैं।



