नई दिल्ली: दिवाली के दिन पूरा बिहार दीपों की रौशनी में नहा रहा था लेकिन इस बार त्योहार का रंग कुछ अलग भी था। लोगों के घर-आंगन में दीप तो जल ही रहे थे लेकिन चुनाव की वजह से सियासी गलियों में भी जगमगाहट दिखाई दी। सभी पार्टी के नेता दिवाली मना रहे थे लेकिन सुर्ख़ियों में आए जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर। प्रशांत किशोर ने इस बार अपनी दिवाली जवानियां गांव में मनाई।
बाढ़ में खत्म हुआ गांव
आपको बता दें कि बिहार के जवानियां गांव में आई बाढ़ ने इस बार पूरे देश का ध्यान अपनी तरफ खींचा। यह पूरा गांव बाढ़ में खत्म हो चुका है। गांव के विस्थापित लोगों के बीच प्रशांत किशोर पहुंचे और समय बिताया। दोपहर से लेकर शाम तक वो बाढ़ पीड़ितों के बीच रहे और उनका हाल जाना।
आज जब पूरा बिहार दिवाली मना रहा है तब प्रशांत किशोर पिछले तीन सालों की तरह इस वर्ष भी जनता के बीच हैं। गंगा में समाहित हो चुके जवानियां गांव के लोगों के बीच पहुंचे हैं। ताकि पूरे बिहार की जनता को यह याद रहे कि जब उनके घरों में दीप जगमगा रहे हैं तब बिहार का एक गांव अंधकार में डूबा… pic.twitter.com/E9ZqcQOSUw
— Jan Suraaj (@jansuraajonline) October 20, 2025
तिरपालों के नीचे लोग
पीड़ितों से मुलाकात के बाद PK ने कहा कि जवानियां गांव के करीब 700 परिवार बांध के किनारे तिरपालों के नीचे अब तक रहने को मजबूर हैं। सरकार ने इनके पुनर्वास के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किया है। हम यहां किसी दिखावे या फिर सहायता वितरण के लिए नहीं आये हैं। इनकी सच्चाई सबके सामने रखने आया हूं। जिनके ऊपर शासन की जिम्मेदारी हैं, वो तो इन्हें भूल ही चुके हैं। दिवाली पर भी ये लोग इस तरह तिरपाल में रहने के लिए मजबूर हैं, अपने घर नहीं जा सके।
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स्थानीय लोग खुश
प्रशांत किशोर ने इस मौके पर बिहारवासियों से अपील की कि दिवाली की खुशियों के बीच उन लोगों को भी याद कीजिये, जो अपने घरों से दूर हैं। बांधों पर जीवन बिता रहे। स्थानीय लोगों में भी पीके के आने पर ख़ुशी दिखाई दी। उनका कहना है कि कोई अधिकारी या जन प्रतिनिधि हाल लेने नहीं आता है।



