जहानाबाद: एनडीए में सीट शेयरिंग का मामला पूरी तरह से स्पष्ट हो गया है। घटक दलों में सीटों का बंटवारा भी कर लिया गया है। इसमें सबसे अधिक चर्चा लोजपा रामविलास पार्टी की हो रही है। जहानाबाद लोकसभा क्षेत्र में दो विधानसभा सीट का टिकट लोजपा रामविलास पार्टी के खाते में जाना इसके कार्यकर्ताओं के उत्साह को चरम पर पहुंचा दिया है। अरवल से हमेशा भाजपा तथा मखदुमपुर से जीतन राम मांझी की पार्टी हम एनडीए के तहत चुनाव लड़ती रही है। लेकिन इस बार ये दोनों सीटें लोजपा के खाते में गई हैं।
अरवल विधानसभा की बात करें तो 2005 के विधानसभा चुनाव में लोजपा के उम्मीदवार दुलारचंद यादव ने भाजपा को हराते हुए जीत हासिल की थी। हालांकि अगले विधानसभा चुनाव 2010 में भाजपा के चितरंजन कुमार ने दुलारचंद यादव को चुनाव में शिकस्त दी थी। 2015 के विधानसभा चुनाव में लोजपा एनडीए के साथ हो गई थी, ऐसे में यहां से चुनाव मैदान में भाजपा को टिकट मिला था, लेकिन महागठबंधन के उम्मीदवार रविंद्र सिंह चुनाव जीतने में सफल रहे।
2020 के चुनाव में एनडीए की ओर से यहां भाजपा के उम्मीदवार दीपक शर्मा मैदान में थे। इस चुनाव में लोजपा की कमान चिराग पासवान के हाथों में थी। लेकिन भाजपा के प्रत्याशी होने के कारण यहां चिराग द्वारा उम्मीदवार नहीं दिया गया था। ऐसे में इस विधानसभा सीट से 2010 के बाद पहली बार लोजपा का उम्मीदवार मैदान में रहेंगे। एनडीए हमेशा यहां से भूमिहार उम्मीदवार को अपना चेहरा बनाता रहा है। अब लोजपा रामविलास पार्टी के लिए पहले से चले आ रहे जातीय समीकरण को साधना बड़ी चुनौती होगी।
अरवल में भाजपा वोटरों को साधना एनडीए के लिए चुनौती
अरवल विधानसभा क्षेत्र में हमेशा भाजपा, राजद और भाकपा माले के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होता रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव से भाकपा माले महागठबंधन में शामिल हो गई, जिससे राजद की दावेदारी कमजोर हो गई। हमेशा चुनाव में सीधे मुकाबले में रहने वाली भाजपा इस बार पूरी तरह से सीन से गायब है।
एनडीए की ओर से लोजपा को टिकट दिया गया है। इससे भाजपा समर्थकों में मायूसी देखी जा रही है। इस मायूसी को दूर करते हुए अपने पक्ष में जोड़ना यहां लोजपा के लिए बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, लोजपा का उम्मीदवार होने से महागठबंधन के लिए भी चुनौती बढ़ सकती है। भाकपा माले का दलित वोट वर्ग पर बड़ा प्रभाव माना जाता रहा है, लेकिन लोजपा के मैदान में आने से इसमें सेंधमारी की संभावना बढ़ गई है।
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मखदुमपुर सीट: लोजपा की नई चुनौती
मखदुमपुर विधानसभा सीट आरक्षित होने के बाद लोजपा यहां कभी चुनाव नहीं लड़ी। हमेशा इस सीट से एनडीए की ओर से जीतन राम मांझी की पार्टी चुनाव लड़ती रही है। पिछले विधानसभा में लोजपा ने रानी कुमारी को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उनका नामांकन रद्द हो गया था। इस बार भी संभावना है कि रानी कुमारी ही पार्टी की उम्मीदवार होंगी। वर्तमान में रानी कुमारी जहानाबाद जिला परिषद की अध्यक्ष हैं। चौधरी जाति से आने वाली रानी लगातार क्षेत्र से जुड़ी रही हैं और स्वर्ण मतदाताओं पर उनका अच्छा-खासा प्रभाव माना जाता है। इस तरह से एनडीए ने लोजपा के माध्यम से महागठबंधन को मजबूत टक्कर देने की कोशिश की है।



