पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। दूसरे चरण की 122 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया सोमवार (13 अक्टूबर) से शुरू हो गई है, जिसकी वोटिंग 11 नवंबर को होनी है। तीन दिन बाद 14 नवंबर को नतीजे आएंगे। एनडीए के प्रमुख घटक दल जदयू, भाजपा, लोजपा और हम के बीच सीट बंटवारे के बाद अब प्रत्याशियों के नामों का एलान जल्द ही होने वाला है। इस बीच, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) ने इस चुनाव में हिंदू उम्मीदवारों को भी टिकट देने की घोषणा कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। राज्य के मुंगेर, भागलपुर, किशनगंज, खगड़िया, बांका, सहरसा, सुपौल जैसे जिलों में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
मुंगेर पर जदयू की मजबूत दावेदारी की तैयारी
मुंगेर संसदीय क्षेत्र, जिसके अंतर्गत छह विधानसभा सीटें आती हैं – मुंगेर, जमालपुर, सूर्यगढ़ा, लखीसराय, बाढ़ और मोकामा, पर जदयू अपनी सियासी पकड़ मजबूत करना चाह रहा है। पार्टी ने इन छह सीटों पर अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इसका मुख्य लक्ष्य इन क्षेत्रों में जदयू का प्रभाव इतना बढ़ाना है कि 2029 के लोकसभा चुनाव तक पार्टी का राजनीतिक आधार अटूट बना रहे। मुंगेर जिले का एक विधानसभा क्षेत्र तारापुर जमुई लोकसभा क्षेत्र में है।
मुस्लिम बहुल सीटों पर ओवैसी की नजर
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम की नजरें सीमांचल के साथ-साथ बिहार की अन्य मुस्लिम बहुल सीटों पर भी टिकी हैं। पार्टी ने अपनी पहली सूची में 32 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। इनमें किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, गया, मोतिहारी, नवादा, जमुई, भागलपुर, सिवान, दरभंगा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी, वैशाली और गोपालगंज की मुस्लिम बहुल सीटें शामिल हैं।
हिंदू उम्मीदवार को भी टिकट
एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने किशनगंज में घोषणा की है कि उनकी पार्टी इस बार के चुनाव में हिंदू उम्मीदवारों को भी टिकट देगी। उन्होंने यह भी बताया कि उम्मीदवारों के लिए पटना या दिल्ली जाने की जरूरत नहीं है, बल्कि किशनगंज में ही आवेदन लिए जा रहे हैं, जबकि अंतिम फैसला हैदराबाद से होगा। गठबंधन न हो पाने के कारण ओवैसी की पार्टी तीसरा विकल्प तैयार कर रही है। पार्टी छोड़ने वालों को ‘गद्दार’ बताते हुए, इस बार शामिल होने वाले नए सदस्यों को अल्लाह और ईश्वर की शपथ दिलाई जा रही है।
बेलहर में सांसद और विधायक के बीच सीधी लड़ाई
बांका जिले के बेलहर विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक हलचल पक्ष-विपक्ष की बजाए सांसद और विधायक के बीच सीधी लड़ाई की ओर इशारा कर रही है। जदयू विधायक मनोज यादव ने सांसद गिरिधारी यादव को खुलेआम चुनाव लड़ने की चुनौती दी है, यह कहते हुए कि उनके बेटे (चाणक्य प्रकाश रंजन) पार्टी में कोई पद नहीं रखते। वहीं, सांसद गिरिधारी यादव ने पलटवार करते हुए कहा है कि मनोज यादव ने खुद पार्टी के साथ भीतरघात किया है, इसलिए उन्हें बोलने का कोई अधिकार नहीं है। सांसद गिरिधारी यादव के पुत्र चाणक्य प्रकाश रंजन के राजद के टिकट पर उम्मीदवार होने की प्रबल संभावना है।
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सहरसा में 1990 के बाद कांग्रेस का किला ढहा
आजादी के बाद कोसी प्रभावित सहरसा जिला लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ रहा। 1977 के अपवाद को छोड़कर, यहां के तीन बड़े कांग्रेस नेता लहटन चौधरी, रमेश झा और चौधरी सलाउद्दीन बिहार की राजनीति में कद्दावर मंत्री के रूप में दिशा देते रहे। हालांकि, 1990 के बाद जिले का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल गया और कांग्रेस का यह मजबूत किला ढह गया। कांग्रेस की पकड़ कमजोर होते देख, पूर्व मंत्री चौधरी सलाउद्दीन के पुत्र महबूब अली कैशर ने पार्टी से संबंध समाप्त कर पहले लोजपा और अब राजद का दामन थाम लिया है। उनके पुत्र वर्तमान में राजद के विधायक हैं। सुपौल विधानसभा क्षेत्र के पहले विधायक लहटन चौधरी कर्णपुर गांव के निवासी थे, जिसने कोसी क्षेत्र में नमक आंदोलन का बिगुल फूंका था।
खगड़िया की अलौली सुरक्षित सीट
खगड़िया जिले की चार विधानसभा सीटों में से अलौली (सुरक्षित) सीट से आज तक किसी महिला को बिहार विधानसभा में प्रतिनिधित्व का मौका नहीं मिला है। 2005 के चुनाव में राजद की मीरा देवी और 2020 के चुनाव में जदयू की साधना देवी दूसरे स्थान पर रही थीं। वहीं, बेलदौर विधानसभा (पूर्व में चौथम) से सिर्फ 2005 (फरवरी) के चुनाव में लोजपा से सुनीता शर्मा को जीत मिली थी।
कटिहार में मतदाता सूची से हटाए गए नाम
कटिहार जिले में मतदाता पुनरीक्षण के बाद कुल 1,84,254 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित सूची में अब कुल 20,44,809 मतदाता हैं। इस प्रक्रिया में सबसे अधिक मतदाता बलरामपुर विधानसभा क्षेत्र से और सबसे कम बरारी विधानसभा क्षेत्र से हटाए गए हैं। आपत्तियों की समीक्षा के बाद कुछ नामों की वापसी संभव है।



