नई दिल्ली: सीरिया में बशर अल असद (Bashar al Assad) की सत्ता समाप्त होने के बाद हुए पहले संसदीय चुनावों (Syria Election 2025) के शुरुआती नतीजे सामने आए हैं, जिनमें महिलाओं और धार्मिक अल्पसंख्यकों की भागीदारी बेहद सीमित रही।
पहली बार परोक्ष मतदान से चुनी गई सांसद
सीरिया में सोमवार को इतिहास रचा गया जब देश में पहली बार संसद के लिए परोक्ष मतदान (Indirect Voting) आयोजित किया गया। यह मतदान बशर अल असद के सत्ता से हटने के बाद हुए पहले संसदीय चुनाव हैं। इस प्रक्रिया के तहत करीब 6,000 क्षेत्रीय निर्वाचक मंडल सदस्यों ने पूर्व-स्वीकृत उम्मीदवारों की सूचियों में से अपने प्रतिनिधियों का चयन किया।
119 सांसदों का हुआ चयन
सीरिया की चुनाव समिति ने शुरुआती परिणाम जारी करते हुए बताया कि कुल 119 सांसदों का चयन किया गया है। हालांकि, किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले, इस पर अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। 210 सदस्यीय संसद में लगभग दो-तिहाई सीटें इस मतदान प्रक्रिया के तहत भरी गई हैं, जबकि बाकी एक-तिहाई सीटों पर राष्ट्रपति अहमद अल शरा नियुक्ति करेंगे।
महिलाओं की सीमित भागीदारी
प्रारंभिक नतीजों में महिलाओं की स्थिति निराशाजनक रही है। चुने गए 119 सांसदों में केवल छह महिलाएं शामिल हैं। चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि यह आंकड़ा देश में लैंगिक समानता की दिशा में लंबा रास्ता तय करने की जरूरत को दर्शाता है।
अल्पसंख्यकों को भी कम प्रतिनिधित्व
धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को भी सीमित प्रतिनिधित्व मिला है। कुल सीटों में से 10 सीटें अल्पसंख्यक समुदायों को मिली हैं, जिनमें कुर्द, ईसाई और दो अलावी उम्मीदवार शामिल हैं। गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति बशर अल असद स्वयं अलावी संप्रदाय से थे, जिन्होंने दो दशक से अधिक समय तक देश पर शासन किया था।
राजनीतिक स्थिरता की ओर कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव राजनीतिक स्थिरता बहाल करने की दिशा में अहम कदम है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि परोक्ष मतदान प्रणाली से आम नागरिकों की भागीदारी सीमित रह जाती है और असली लोकतंत्र की भावना कमजोर पड़ती है।
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नए युग की शुरुआत या पुरानी राजनीति की वापसी?
इन नतीजों के बाद अब सबकी निगाहें राष्ट्रपति अहमद अल शरा पर टिकी हैं, जो शेष सीटों के लिए नामांकन करेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि वे किस तरह देश में समावेशी राजनीति और लोकतांत्रिक संतुलन स्थापित करने की कोशिश करते हैं।
सीरिया के इस पहले परोक्ष संसदीय चुनाव ने एक ओर जहां नई शुरुआत का संकेत दिया है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं और अल्पसंख्यकों की सीमित सफलता ने देश की राजनीतिक विविधता और समानता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।



