नई दिल्ली: भारत में पहली बार आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप (World Para Athletics India 2025) 27 सितंबर से 5 अक्टूबर तक चली। यह आयोजन खेल जगत के लिए गर्व का विषय तो रहा, लेकिन साथ ही इसने कई गंभीर खामियों को भी उजागर किया। विदेशी कोच को कुत्ते (Dog Attack) के काटने से लेकर नए मोंडो ट्रैक (Mondo Track) पर कांच के टुकड़े मिलने तक की घटनाओं ने आयोजन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए।
सफलता का जश्न, पर सवाल भी कई
दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम (Jawaharlal Nehru Stadium) में संपन्न इस प्रतियोगिता में भारतीय पैरा एथलीटों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड संख्या में पदक जीते। यह 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद भारत में हुआ सबसे बड़ा बहुराष्ट्रीय खेल आयोजन था, जिसमें 104 देशों के 2,200 से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की। भारत की टीम पदक तालिका में शीर्ष 10 में रही, जिसने देश की खेल प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साबित किया।
मोंडो ट्रैक पर कांच के टुकड़े, सुरक्षा पर उठे सवाल
25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया नौ लेन वाला नया नीला मोंडो ट्रैक आयोजन से ठीक पहले ही तैयार हुआ था। लेकिन उद्घाटन से एक दिन पहले इस ट्रैक पर टूटी बोतलों के कांच के टुकड़े पाए गए, जिससे सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई। इसके अलावा, नो व्हीकल जोन में वीआईपी वाहनों का प्रवेश भी देखा गया, जबकि यह क्षेत्र दिव्यांग खिलाड़ियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंधित किया गया था।
विदेशी कोचों पर कुत्तों का हमला
सबसे शर्मनाक घटना तब हुई जब अभ्यास सत्र के दौरान जापान और केन्या के दो विदेशी कोचों को स्टेडियम परिसर में आवारा कुत्तों ने काट लिया। जापानी कोच मेको ओकुमात्सु की पिंडली पर गहरा घाव हुआ, जिसके लिए टांके लगाने पड़े। यह घटना न केवल सुरक्षा प्रबंधन की कमजोरी को उजागर करती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि पर भी नकारात्मक असर डालती है। एक सुरक्षा गार्ड पर भी इसी दौरान कुत्ते ने हमला किया।
लॉजिस्टिक गड़बड़ियां और अव्यवस्था
प्रतियोगिता के दौरान बुनियादी ढांचे और लाजिस्टिक्स से जुड़ी कई खामियां भी सामने आईं। अभ्यास ट्रैक और जिम्नेजियम का उद्घाटन आयोजन से एक दिन पहले ही किया गया। वहीं, स्टार्टर गन में तकनीकी खराबी और उच्च आर्द्रता के कारण करीब 25 एथलीटों को थकान और गर्मी की समस्या झेलनी पड़ी।
भारत की मेजबानी क्षमता पर सवाल
भारत वर्तमान में 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games 2030) और 2036 ओलंपिक (Olympic 2036) व पैरालंपिक खेलों की मेजबानी की दौड़ में है। इस आयोजन को देश के लिए “लिटमस टेस्ट” माना जा रहा था। भारतीय एथलीटों ने जहां मैदान पर देश का नाम रोशन किया, वहीं आयोजकों की लापरवाही ने भारत की वैश्विक खेल छवि को नुकसान पहुंचाया।
विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप ने भारतीय पैरा खिलाड़ियों की क्षमता और जज्बे को तो उजागर किया, लेकिन साथ ही यह दिखा दिया कि मेजबानी के मामले में भारत को अभी लंबा रास्ता तय करना है। खेल मंत्रालय, SAI और पैरालंपिक समिति को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी गलतियां दोबारा न हों।



