नई दिल्ली: उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और अलीपुरद्वार जिलों में 4 से 5 अक्टूबर तक हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। जलपाईगुड़ी में 370 मिमी और दार्जिलिंग में 270 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसने बाढ़ जैसी स्थिति पैदा की, जिससे सड़कें, घर और आजीविका को भारी नुकसान हुआ। भारतीय मौसम विभाग ने पहले ही भारी बारिश की चेतावनी दी थी और 5 अक्टूबर के लिए रेड अलर्ट जारी किया कि अगले कुछ दिनों तक भारी वर्षा की आशंका बनी हुई है।
भूस्खलनों ने बढ़ाई मुश्किलें
दार्जिलिंग और कालिम्पोंग में 100 से अधिक भूस्खलनों ने सड़कों को अवरुद्ध कर दिया, जिसमें से 35 बड़े पैमाने के थे। राष्ट्रीय राजमार्ग-10 और रोहिणी रोड के बंद होने से सिक्किम का संपर्क देश से लगभग कट गया। सिक्किम पुलिस ने बताया कि गंगटोक सहित कई इलाकों में सड़कें बंद हैं। गोरखालैंड प्रशासन ने पर्यटकों की सुरक्षा के लिए सभी पर्यटन स्थलों को बंद कर दिया। पंखाबाड़ी रोड के जरिए कुछ पर्यटकों को निकाला जा रहा है, लेकिन जलपाईगुड़ी में हॉलोंग नदी पर टूटा लकड़ी का पुल और madarihat टूरिस्ट लॉज में फंसे सैकड़ों पर्यटक स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं।
भूटान के डैम से बढ़ा खतरा
भूटान के ताला हाइड्रो पावर डैम से पानी का ओवरफ्लो शुरू होने से उत्तर बंगाल में बाढ़ का खतरा और गहरा गया। भूटान सरकार के अनुसार, वांगचू नदी का जलस्तर सुबह 4 बजे 200 क्यूमेक्स से बढ़कर 11 बजे तक 1,260 क्यूमेक्स हो गया। अलीपुरद्वार के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल ने उच्चतम चेतावनी जारी की है।
सरकारी कदम और आरोप
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 6 अक्टूबर को स्थिति का जायजा लेने उत्तर बंगाल जाएंगी। उन्होंने पर्यटकों से सुरक्षित रहने की अपील की। राज्य के सिंचाई मंत्री मानस भूइयां ने केंद्र सरकार पर भूटान के साथ नदी आयोग गठन में देरी का आरोप लगाया, जिससे बाढ़ की समस्या बढ़ी। पर्यावरणविदों ने अनियोजित शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन को स्थिति बिगड़ने का कारण बताया।



