नई दिल्ली: 90/20 अध्ययन तकनीक एक वैज्ञानिक विधि है, जिसमें 90 मिनट तक गहन ध्यान से पढ़ाई या काम किया जाता है, इसके बाद 20 मिनट का ब्रेक लिया जाता है। यह मस्तिष्क की प्राकृतिक ऊर्जा चक्रों, यानी अल्ट्राडियन रिद्म्स पर आधारित है। यह चक्र 90 से 120 मिनट तक चलता है, जिसमें मस्तिष्क उच्च एकाग्रता के साथ काम करता है। इसके बाद 20 मिनट का विश्राम मस्तिष्क को रिचार्ज करता है, जिससे मानसिक थकान कम होती है और उत्पादकता बढ़ती है। यह तकनीक छात्रों और पेशेवरों के लिए खासतौर पर उपयोगी है।
क्यों है यह प्रभावी?
90/20 नियम मस्तिष्क के जैविक चक्रों का लाभ उठाता है। नींद विशेषज्ञ नथानियल क्लेटमैन के अनुसार, हमारा दिमाग दिन-रात उच्च और निम्न ऊर्जा के चक्रों में काम करता है। 90 मिनट के फोकस सत्र में मस्तिष्क त्रुटि-मुक्त और सतर्क रहता है। इसके बाद 20 मिनट का ब्रेक मस्तिष्क को रिकवर करने में मदद करता है। मनोवैज्ञानिक एंडर्स एरिकसन ने पाया कि शीर्ष प्रदर्शन करने वाले लोग, जैसे वायलिन वादक, इस तरह के चक्रों का पालन करते हैं, जिससे उनकी उत्पादकता 40% तक बढ़ती है और थकान 50% तक कम होती है।
ब्रेक का महत्व
20 मिनट का ब्रेक मस्तिष्क और शरीर को तरोताजा करने के लिए जरूरी है। इस दौरान हल्की सैर, स्ट्रेचिंग या प्रकृति के बीच समय बिताना फायदेमंद होता है। स्क्रीन या काम से जुड़ी गतिविधियों से बचना चाहिए। यह ब्रेक न केवल ऊर्जा बहाल करता है, बल्कि अगले सत्र के लिए एकाग्रता को भी बढ़ाता है।
थकान के संकेत पहचानें
जंभाई, बेचैनी, ध्यान भटकना या छोटी-छोटी गलतियां करना यह दर्शाता है कि मस्तिष्क को विश्राम की जरूरत है। इन संकेतों को नजरअंदाज करने से उत्पादकता घटती है। 90/20 नियम इन संकेतों को पहचानकर समय पर ब्रेक लेने की सलाह देता है।
90/20 नियम कैसे अपनाएं?
सबसे पहले, अपने दिन के ऊर्जा स्तर को समझें। सुबह या दोपहर में जब आप सबसे अधिक सतर्क हों, उस समय 90 मिनट के फोकस सत्र रखें। महत्वपूर्ण और कठिन कार्यों को इस समय के लिए चुनें। ब्रेक में सक्रिय रहें, जैसे टहलें या गहरी सांस लें और डिवाइस से दूरी बनाएं। इस प्रक्रिया को नियमित रूप से दोहराने से पढ़ाई और काम में निरंतर सुधार होगा।



