नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने राजधानी में रह रहे कश्मीरी विस्थापितों को बड़ी राहत दी है। राहत राशि के लिए कश्मीरी विस्थापितों पर लगी आय की सीमा को समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा सरकार ने एक विशेष अवसर योजना भी शुरू की है। इसके तहत विस्थापित कश्मीरी अपने परिवार का रिकार्ड अपडेट करा सकेंगे। सरकार ने कहा है कि विस्थापितों को दी जाने वाली राहत राशि का सरलीकरण कर दिया गया है और जल्द ही राहत राशि देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी।
ये जानकारी देते हुए मुख्यमत्री रेखा गप्ता ने बताया कि 90 के दशक की शुरुआत में कश्मीर में आतंकवाद के कारण अपना घर छोड़ने को मजबूर कश्मीरी हिंदू परिवार दिल्ली और एनसीआर में आ बसे थे। इन परिवारों के लिए सरकार की ओर से एडहॉक मंथली रिलीफ के रूप में राहत राशि देने की शुरुआत की थी। लेकिन कठिन और जटिल नीतियों की वजह से कश्मीरी विस्थापितों को दिक्कत झेलनी पड़ रही थी। इनमें दो शर्तें सबसे अधिक राहत की राह में अड़चन थी। इनमें से एक परिवार की 26 हजार 800 रुपये मासिक की आय सीमा और दूसरा परिवार के रिकॉर्ड का अपडेट न हो पाना। इस वजह से विस्थापितों को राहत राशि नहीं मिल रही थी। हाल ही में जब शिक्षामत्री आशीष सूद ने इन विस्थापितों को बुलाकर बात की। उसके बाद रेवन्यू डिपार्टमेंट की ओर से आदेश जारी किए गए।
ये विस्थापितों का अधिकार है
मुख्यमत्री ने कहा कि ये फैसला इसलिए किया गया है,क्योंकि ये राहत कोई दान नहीं है बल्कि ये विस्थापितों का अधिकार है। मानवीय आधार पर ये दिया ही जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब कश्मीरी विस्थापितों के परिवार वालों पर मासिक आय की कोई शर्त नहीं होगी। अब तक ये शर्त एक बड़ी बाधा थी। इसके अलावा विस्थापित अपने परिवार के सदस्यों का रिकॉर्ड भी अपडेट नहीं कर पा रहे थे। अब दिल्ली में रजिस्टर्ड कश्मीरी विस्थापितों पर आय की कोई सीमा नहीं होगी। इसके अलावा उन्हें अपने परिवार के सदस्यों का रिकॉर्ड अपडेट करने का एक अवसर भी दिया जाएगा। इससे सालों से अटकी परिवारिक सूचियों में पारदर्शिता आएगी।
परिवार को हर माह 13 हजार रुपये देने की व्यवस्था है
दिल्ली सरकार ने ये भी तय किया है कि सितंबर 2025 तक बकाया राहत राशि भी जारी की जाएगी ताकि प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक राहत और भरोसा मिल सके। मुख्यमत्री ने बताया कि इस समय दल्ली में 1800 कश्मीरी विस्थापित रहते हैं। नियमों के मुताबिक हर परिवार में अधिकतम चार सदस्यों को ये राहत राशि देने का प्रावधान है। हर सदस्य को हर माह 3250 रुपये यानी परिवार को हर माह 13 हजार रुपये देने की व्यवस्था है। मुख्यमंत्री का कहना है कि यह कदम न केवल राहत वितरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करेगा बल्कि जम्मू-कश्मीर में पहले से लागू राहत व्यवस्थाओं के अनुरूप समानता भी सुनिश्चित करेगा। सबसे बढ़कर यह निर्णय विस्थापित समुदाय की असाधारण पीड़ा को सम्मानपूर्वक स्वीकार करता है और उनकी दशकों पुरानी व्यथा पर सरकार का मानवीय मरहम रखता है।



