नई दिल्ली: आज देश भर में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा (Dussehra 2025) मनाया जा रहा है। हर साल आश्विन शुक्ल की दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाता है। इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। इसलिए लोग जगह-जगह पर रावण का पुतला दहन कर विजयादशमी मनाते हैं। शक्तिशाली रावण मायावी शक्तियों के बलबूते पूरी सृष्टि को अपने कब्जे में लेना चाहता था लेकिन राम ने उन्हें परास्त कर दिया। राम के अलावा 3 और भी ऐसे योद्धा थे, जिसने लंकापति को हराया था। आइये जानते हैं इसके पीछे की कहानी-
बाली ने हराया
रामायण के 34वें सर्ग में रावण और बाली के युद्ध का जिक्र किया गया है। रावण ने बाली को युद्ध के लिए ललकारा, लेकिन जैसे ही युद्ध शुरू हुआ, बाली ने उसे अपनी बाईं भुजा (काख) में दबा लिया और समुद्र की परिक्रमा करने लगा। रावण के मंत्री उसके पीछे-पीछे दौड़ते रह गए। बाली की यह शक्ति देखकर रावण को अपनी सीमा का एहसास हुआ और उसका घमंड चकनाचूर हो गया।
सहस्रबाहु ने किया पराजित
भागवत पुराण में वर्णित है कि एक बार रावण समुद्र तट पर शिवलिंग की स्थापना कर भगवान शिव की पूजा कर रहे थे। उसी समय हैहय वंश के राजा सहस्रबाहु ने अपने बल से नर्मदा नदी का प्रवाह रोक दिया, जिससे रावण की पूजा सामग्री बह गई। क्रोधित रावण ने उसे चेतावनी दी, लेकिन सहस्रबाहु की ताकत से वह अनजान था। युद्ध में सहस्रबाहु ने एक ही प्रहार में रावण को मूर्छित कर दिया।
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महादेव ने सिखाया सबक
रावण भगवान शिव का परम भक्त था, लेकिन उसका अहंकार सीमा पार कर गया था। एक बार उसने कैलाश पर्वत को ही अपने साथ लंका ले जाने की ठान ली। उसने पर्वत को उठाने का प्रयास किया, तभी भगवान शिव ने अपने अंगूठे से पर्वत को दबा दिया। रावण का हाथ पर्वत के नीचे दब गया और वह दर्द से तड़पने लगा। तब जाकर उसे शिव की महाशक्ति का एहसास हुआ। रावण ने अपनी गलती मानते हुए वहीं ‘शिव तांडव स्तोत्र’ की रचना की और क्षमा याचना की।



