नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद चुनाव आयोग ने मंगलवार अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। इससे सियासी हलचल बढ़ गई है। भाजपा की 33 सीटों पर मतदाताओं की संख्या में गिरावट आई है, जिससे NDA को झटका लग सकता है। वहीं, RJD नेता तेजस्वी यादव की सीट पर भी वोटर घटे हैं, जो महागठबंधन के लिए चिंता का सबब बन गया है। चुनाव आयोग के इस डेटा से पार्टियां अपनी रणनीति पर फिर से विचार कर रही हैं, जबकि विपक्ष ‘वोट चोरी’ के आरोप लगा रहा है।
अभी इतने वोटर
इस लिस्ट के मुताबिक राज्य में अभी 7.42 करोड़ वोटर हैं, जो 2020 के चुनाव से ज्यादा हैं। 2020 विधानसभा चुनाव के दौरान 7.36 करोड़ वोटर थे। 5.45 लाख वोटर ज्यादा जुड़े हैं। हालांकि पिछले 20 साल में हुए 3 विधानसभा चुनावों से कम वोटर जुड़े हैं। साल 2020 में 66 लाख, 2015 में 1.19 करोड़ और 2010 में 37.3 लाख नए वोटर्स जुड़े थे। इसके अलावा SIR से जुड़े हुए और भी कई आंकड़े हैं-
किसको हुआ ज्यादा नुकसान
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फ़ाइनल वोटर लिस्ट में 44 फीसदी सीटों पर मतदाता घटे हैं। ये डेटा 221 विधानसभा सीटों का है, जिसमें से 98 सीट पर वोटर्स घाटे हैं। इन 98 में 45 सीटें महागठबंधन ने जीती थी और 50 सीटें NDA ने। सबसे अधिक भाजपा की 33 सीटों पर मतदाता घटे हैं। इसमें राजद के 28, कांग्रेस की 8, जदयू की 16, लेफ्ट की 8 सीटें शामिल हैं। 56 प्रतिशत ऐसी सीटें हैं, जिस पर वोटर्स बढ़े हैं। जिन 123 सीटों पर मतदाताओं की संख्या में इजाफा हुआ है, उसमें की 32 सीटों पर अभी भाजपा और 26 पर जदयू का कब्ज़ा है। 41 सीटें राजद, 9 सीटें कांग्रेस और 5 सीटें लेफ्ट के कब्जे में हैं।
तेजस्वी की सीट पर घटे वोटर
संभाग के लिहाज से देखें तो 2 क्षेत्र में वोटर घटे हैं- सारण और शाहाबाद। दोनों संभागों को मिलाकर 1.69 लाख वोटर कम हो गए हैं। इन संभागों में 46 सीटें आती है। इसमें 46 में से 34 सीट महगठबंधन के पास हैं। इस तरह से इन दोनों संभागों में महागठबंधन की 74 प्रतिशत सीटों पर मतदाता कम हो गए हैं। पूर्व डिप्टी सीएम और वैशाली के राघोपुर से विधायक तेजस्वी यादव की सीट पर 2020 की तुलना में 1720 मतदाता इस बार कम हैं। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की लखीसराय सीट पर 21,518 वोटर बढ़ गए हैं।
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69.29 कटे नाम
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR लिस्ट में 69.29 लाख नाम काटे गए हैं। साथ ही 21.53 लाख नए नाम जोड़े गए हैं। SIR से पहले बिहार में 7.89 करोड़ वोटर्स थे, जो अब घटकर 7.42 करोड़ रह गए हैं। जिन नामों को हटाया गया है, उसमें 22.34 लाख लोग मृत पाए गए थे। 6.85 लाख ऐसे लोग थे, जिनका नाम 2 जगह मिले और 36.44 लाख ऐसे हैं जो दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं।



